जाटों को आरक्षण मिले, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए : भरतपुर की बैठक में उठी आवाज
गणमान्य लोगों ने कहा— आरक्षण आंदोलन संवैधानिक अधिकार, लेकिन भाषा की मर्यादा और विकास कार्यों में बाधा स्वीकार नहीं
भरतपुर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भरतपुर स्थित राज गार्डन मैरिज होम में सोमवार को जाट समाज के गणमान्य लोगों एवं आरक्षण संघर्ष समिति से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों की एक बैठक एवं प्रेस वार्ता आयोजित की गई। बैठक में जाट समाज को आरक्षण दिए जाने का समर्थन किया गया, लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति किए जाने और अनावश्यक विवाद खड़े करने का विरोध भी व्यक्त किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण को लेकर आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन आंदोलन के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बारे में अनर्गल टिप्पणियां करना किसी को शोभा नहीं देता।
बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि वर्तमान में भरतपुर में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थों के चलते इन विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करना चाहते हैं। वक्ताओं ने जाट समाज के ओबीसी आरक्षण के मुद्दे के समाधान के लिए गैर-राजनीतिक लोगों की एक बड़ी बैठक आयोजित कर मुख्यमंत्री से संवाद स्थापित करने की पहल का स्वागत किया।
बैठक में बाहरी नेताओं की दखल अंदाजी का भी विरोध किया गया। उपस्थित लोगों का कहना था कि आरक्षण के मुद्दे का समाधान स्थानीय स्तर पर संवाद और सकारात्मक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भरतपुर एवं जाट समाज के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और प्रस्ताव दिए हैं। इनमें राजा खेमकरण सोगरिया स्मारक के लिए तीन करोड़ रुपये की स्वीकृति, महाराजा सूरजमल की विशाल प्रतिमा तथा वीर गोकुल सिंह स्मारक सहित अनेक प्रस्ताव शामिल हैं। इससे जाट समाज के प्रति उनकी सकारात्मक सोच और लगाव परिलक्षित होता है।
बैठक में यह भी कहा गया कि भरतपुर के विकास और समाज के हितों के विरुद्ध चलाए जा रहे कथित राजनीतिक एजेंडे से लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। समाज के सभी वर्गों से अपील की गई कि वे ऐसे तत्वों से सावधान रहें जो समाज और क्षेत्र के विकास की बजाय राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।


