मोक्ष कल्याणक में गूंजे भगवान आदिनाथ के जयघोष, रथयात्रा के साथ पंचकल्याणक महोत्सव का समापन

Jun 26, 2026 - 19:58
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मोक्ष कल्याणक में गूंजे भगवान आदिनाथ के जयघोष, रथयात्रा के साथ पंचकल्याणक महोत्सव का समापन

लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) कस्बे में पिछले चार दिनों से आयोजित हो रहा भव्य पंचकल्याणक महोत्सव शुक्रवार को पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। संत आचार्य ज्ञानभूषण जी महाराज के ससंघ पावन सानिध्य में आयोजित इस महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक के अवसर पर पूरा क्षेत्र भगवान आदिनाथ के जयघोषों से गुंजायमान रहा। इस दौरान आयोजित विश्व शांति महायज्ञ में आहुतियां देकर विश्व कल्याण और शांति की कामना की गई। साथ ही, नवनिर्मित जैन मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ भगवान की प्रतिमा स्थापित की गई। तीर्थंकर बालक के सभी सांसारिक कर्मों से मुक्त होकर सिद्धशिला पर विराजमान होने के इस अलौकिक मोक्ष के क्षण को श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ मनाया।

धार्मिक अनुष्ठानों से महका माहौल, कृत्रिम कैलाश पर्वत रहा मुख्य आकर्षण

  • मोक्षकल्याणक पूजन: अंतिम दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातः काल जिनाभिषेक, शांतिधारा और विशेष मोक्षकल्याणक पूजा के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान को अर्घ्य समर्पित किए।
  • कैलाश पर्वत के दर्शन: महोत्सव स्थल पर कृत्रिम रूप से कैलाश पर्वत की मनमोहक रचना की गई थी, जो सभी के आकर्षण का केंद्र रही। मान्यता के अनुसार, इसी पवित्र पर्वत से भगवान आदिनाथ ने निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था।
  • भव्य शोभा यात्रा: दोपहर में बैंड-बाजों और भजनों की स्वर लहरियों के साथ कस्बे के मुख्य मार्गों से भव्य रथयात्रा निकाली गई। जुलूस में बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु मंगल कलश लिए और नृत्य करते हुए शामिल हुए।

आत्मा से परमात्मा बनने की यात्रा है पंचकल्याणक: जैन

आयोजन का उद्देश्य: पंचकल्याणक महोत्सव के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन अगोनिज ने बताया कि पांच दिवसीय पंचकल्याणक जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मा से परमात्मा बनने की आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाना है। इसके अंतर्गत प्रभु के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष—इन पांच कल्याणकों की क्रियाएं जीवंत रूप में की जाती हैं।

मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति होना चाहिए: आचार्य ज्ञानभूषण

मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ज्ञानभूषण जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का अंतिम और सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति होना चाहिए। उन्होंने संशय को दूर करते हुए कहा: "मोक्ष और स्वर्ग की सत्ता पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए। सृष्टि का नियम है कि यहाँ हर चीज का एक जोड़ा है; जैसे दिन है तो रात है, सुख है तो दुख है, स्त्री है तो पुरुष है, और पुण्य है तो पाप है। ठीक इसी प्रकार, यदि यह भौतिक संसार है तो मोक्ष भी सत्य है, और यदि नर्क है तो स्वर्ग का अस्तित्व भी निश्चित है।"

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