जीवन का सच्चा आधार हैं गुरु: गुरु पूर्णिमा पर जानिए गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व और शास्त्रोक्त महिमा
लक्ष्मणगढ़, अलवर/ कमलेश जैन : भारतीय संस्कृति में आदिकाल से ही गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष स्थान रहा है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (29 जुलाई) को देशभर में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ मनाया जाएगा। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इसी दिन प्रथम गुरु महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान प्रदान किया।
जीवन में क्यों अनिवार्य हैं गुरु?
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है— "गुरु बिन ज्ञान न होहि"। गुरु ही ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं और जीवन का सच्चा आधार बनते हैं। गुरु के ज्ञान रूपी प्रकाश से ही मनुष्य के जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार समाप्त होता है।
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प्रथम गुरु माँ: बालक की प्रथम गुरु उसकी माता होती है, जिससे वह संस्कार और जीवन के शुरुआती गुण सीखता है।
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महान दृष्टांत: स्वयं भगवान श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ, श्रीकृष्ण एवं बलराम ने महर्षि सांदीपनि और राजा जनक ने महर्षि अष्टावक्र को गुरु रूप में पाकर स्वयं को बड़भागी माना। भगवान दत्तात्रेय ने तो प्रकृति और जीवों से सीख लेते हुए 24 गुरु बनाए थे।
गुरु मंत्र और पूजन का विशेष महत्व
गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु पूजन, व्यास पूजन और नया गुरु मंत्र प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों का मत है कि केवल दीक्षा देने वाले गुरु ही नहीं, बल्कि अपने से बड़े और माता-पिता को भी गुरु तुल्य मानकर उनका सम्मान करना चाहिए और उनसे जीवन की सीख लेनी चाहिए।
शास्त्रों में गुरु की महिमा: 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े...'
संत कबीरदास जी ने गुरु की महिमा को सर्वोपरि बताते हुए लिखा है:
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।
अर्थ: यदि गुरु और ईश्वर (गोविंद) दोनों एक साथ सामने खड़े हों, तो सबसे पहले गुरु के चरणों में शीश झुकाना चाहिए। क्योंकि गुरु की कृपा और मार्गदर्शन के बिना ईश्वर की प्राप्ति और दर्शन संभव नहीं हैं।
सावन की होगी शुरुआत गुरु पूर्णिमा के साथ ही आषाढ़ मास का समापन हो जाएगा और इसके अगले दिन से पवित्र सावन (श्रावण) माह का प्रारंभ हो जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए गुरु पूर्णिमा अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे बड़ा अवसर है।

