गोविंदगढ़ के सरकारी स्कूलों में मनाया गया रीडिंग प्रमोशन कैम्पेन: रोजाना सातवां कालांश रीडिंग या लाइब्रेरी पीरियड होगा, पहली से आठवीं के बच्चे रोज आधा घंटे पढ़ेंगे रुचि की किताबें
डिजिटल दौर में मोबाइल-स्क्रीन पर उलझी नई-पीढ़ी को किताबों की दुनिया से वापस जोड़ने के लिए राज्य-सरकार ''मिशन-पढ़ो राजस्थान-रीडिंग प्रमोशन-कैंपेन'' शुरू की है। 29 जुलाई 2026 से 16 जनवरी 2027 तक चलने वाले अभियान का मुख्य-मकसद कक्षा 1 से 8 के विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत, कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता-विकसित करना है।
अभियान के तहत गोविंदगढ़ ब्लॉक के सरकारी स्कूलो मे कार्यक्रम-आयोजित किए गए, इस दौरान बच्चे अपनी रुचि की किताबें पढी,, कहानी -कविता का समूहिक-आनंद लिया और पढ़ी गई कहानी पर चर्चा की। रोज 7वां कालांश (30-मिनट) केवल पठन गतिविधियों-जैसे कहानी-वाचन, कविता, समूह-पठन और पुस्तक समीक्षा के लिए होगा।
प्राचार्य राकेश वर्मा ने बताया कि अभियान का फोकस बच्चों में धाराप्रवाह पढ़ने, समझने, कल्पनाशक्ति, तार्किकता और रचनात्मकता विकसित करना होगा। साथ ही स्कूलों में रीडिंग-कॉर्नर, प्रिंट-रिच वातावरण-विकसित करना है, अभियान में कक्षा 1 से 8 के विद्यार्थी का पठन स्तर आंका जाएगा। बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार चार-समूहों में बांटा जाएगा, ताकि कमजोर बच्चों पर ध्यान देकर उन्हें बेहतर-पाठक बना सके।
सीबीईओ विश्वजीत ने बताया कि हर स्कूल को सातवें कालांश को नियमित रीडिंग पीरियड (30 मिनट) के रूप में टाइम टेबल में शामिल करना है। जो केवल पठन गतिविधियों-जैसे कहानी-वाचन, कविता, समूह-पठन और पुस्तक-समीक्षा के लिए तय रहेगा।
कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए कविता-कहानी सुनना, चित्र देखकर चर्चा, डिकोडेबल टेक्स्ट पढ़ना, रोल-प्ले और मातृभाषा-आधारित खेल होंगे। कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों के लिए टाइटल ट्री के तहत कहानी का नाम तय करना, स्टोरी शूज-टू-स्टोरी ट्री में चित्र देखकर कहानी बनाना, माइ-लाइफ, माइ-लाइब्रेरी कार्ड और बुक-टॉक जैसी गतिविधियां होंगी।
कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए पुस्तक समीक्षा, आत्मकथा और जीवनी पर चर्चा, स्वतंत्र-पठन, वाद-विवाद और विचार-प्रस्तुतिकरण आयोजित किए जाएंगे। बच्चों को पुस्तकालय से किताबें ले जाने, प्रार्थना सभा में समाचार वाचन कराने, स्थानीय स्वयंसेवकों को जोड़ने और स्मार्ट-क्लास व आईसीटी-संसाधनों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। अभिभावकों को बच्चों के साथ घर पर पढ़ने के लिए प्रेरित किया है। मेगा पीटीएम, कहानी मेले, विश्व साक्षरता दिवस और निपुण मेले जैसे आयोजनों के जरिए परिवार और समाज को भी जोड़ा जाएगा।

