जलझूलनी एकादशी पर भक्तिमय हुआ खेड़ापा: गंवाई तालाब में ठाकुरजी ने किया जलविहार, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
खेड़ापा / बावड़ी (जोधपुर) — मिश्रीलाल लखारा
बावड़ी उपखंड क्षेत्र के खेड़ापा कस्बे में मंगलवार को जलझूलनी (देवझूलनी) एकादशी का पावन पर्व अपार श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कस्बे के प्राचीन कृष्ण मंदिर से ठाकुरजी की प्रतिमा को आकर्षक रूप से सजी सुसज्जित पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य रेवाड़ी निकाली गई।
जयकारों और पुष्पवर्षा से महका मार्ग
ठाकुरजी की रेवाड़ी में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मार्ग में “हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। ग्रामीणों ने जगह-जगह पालकी पर पुष्पवर्षा कर ठाकुरजी का स्वागत किया, वहीं महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर धार्मिक उत्साह को दोगुना कर दिया। फूल-मालाओं और बिजली की झालरों से सजी पालकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रही।
गंवाई तालाब पर कराया गया जलविहार
रेवाड़ी कस्बे के मुख्य मार्गों से होते हुए गंवाई तालाब पहुंची, जहां पंडित रूपचंद उपाध्याय द्वारा विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ठाकुरजी का जलविहार (स्नान) कराया गया। इसके उपरांत विशेष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई। बारिश नहीं होने के बावजूद ग्रामीणों ने अपनी पौराणिक परंपरा का निर्वहन करते हुए पूरे उत्साह के साथ जलझूलनी महोत्सव मनाया।
मंदिर के पुजारी गणपतसिंह राजपुरोहित ने बताया कि परंपरा अनुसार ठाकुरजी की रेवाड़ी को मंदिर से गांव की नाड़ी (गंवाई तालाब) तक ले जाया गया। जलविहार के पश्चात प्रतिमाओं का पुनः अभिषेक कर उन्हें मंदिर में विधिवत प्रतिष्ठापित किया गया।
इस दौरान अरुणसिंह राजपुरोहित, कमलेश राजपुरोहित, उमाराम चौधरी, मंगाराम प्रजापत, नैनाराम सैन, गेंपरराम मेघवंशी, नैनाराम सुथार, बाबूसिंह राजपुरोहित, अभयसिंह राजपुरोहित सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

