एक तस्वीर से शुरू हुई अनिल चौधरी की अश्व प्रेम मुहिम, आज से चौथा शेखावाटी हॉर्स शो
टोडपुरा (नवलगढ़/झुंझुनूं / सुमेरसिंह राव): मासूम बेटी के एक वाक्य से शुरू हुआ घोड़ों के प्रति लगाव आज राजस्थान में अश्व संस्कृति और संरक्षण की एक मिसाल बन चुका है। टोडपुरा (झुंझुनूं) निवासी अनिल चौधरी का घोड़ों के प्रति जुनून अब केवल व्यक्तिगत शौक तक सीमित न रहकर शेखावाटी हॉर्स शो के माध्यम से देशभर के अश्वपालकों के लिए एक बड़ा मंच बन गया है।
- बेटी की मासूम जिद्द ने बदली जिंदगी की राह
अनिल चौधरी बताते हैं कि करीब चार साल पहले वे अपनी दो-तीन साल की बेटी पूर्वी चौधरी के साथ कमरे में सो रहे थे। सामने दीवार पर सात घोड़ों की तस्वीर लगी थी। पूर्वी ने तस्वीर देखकर सहजता से कहा— "पापा, घोड़े लेकर आओ।" बेटी की इस बात ने अनिल चौधरी के दिल को छू लिया और उन्होंने तीसरे ही दिन पहला घोड़ा खरीद लिया। इसके बाद घोड़ों का कुनबा बढ़ता गया और उनकी दोनों बेटियां, पूर्वी व संवि, भी इस मुहिम की मुख्य प्रेरणा बनीं।
- हजारों किलोमीटर का सफर और संघर्ष के 4 साल
उत्तम नस्ल के घोड़ों की तलाश में अनिल चौधरी ने दूरी की परवाह किए बिना हजारों किलोमीटर की यात्राएं कीं। अपने इस व्यक्तिगत प्रेम को किसान और अश्वपालकों के हित में बदलते हुए उन्होंने 'शेखावाटी हॉर्स शो' की नींव रखी। पिछले चार वर्षों के निरंतर संघर्ष और स्थानीय अश्वपालकों के सहयोग से आज यह आयोजन अश्व संस्कृति को जीवित रखने का एक प्रमुख जरिया बन गया है।
- अश्वपालकों को सम्मान देने का प्रयास
अनिल चौधरी का मानना है कि नवरत्नों में से निकला घोड़ा स्वाभिमान और परंपरा का प्रतीक है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले अश्वपालकों को सम्मान देना, घोड़ों की नस्ल सुधार को बढ़ावा देना और आने वाली पीढ़ियों को इस समृद्ध विरासत से जोड़ना है।
आज आयोजित हो रहे चौथे शेखावाटी हॉर्स शो में राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से अश्वपालक और घोड़ा प्रेमी अपने-अपने घोड़ों की ताकत, सौंदर्य और हुनर का प्रदर्शन करने पहुंच रहे हैं।

