धार्मिक भक्ति के साथ सामाजिक जागृति: पद दंगल के माध्यम से दिया नशामुक्ति और बालिका शिक्षा का संदेश
सकट/नीमला / हीरालाल भूरानी
नीमला में डूंगरी वाले हनुमानजी का वार्षिक मेला संपन्न, भक्ति और लोक संस्कृति का दिखा अद्भुत संगम
सकट। क्षेत्र के नीमला गांव स्थित डूंगरी वाले हनुमानजी मंदिर परिसर में मंगलवार को वार्षिक मेले का भव्य आयोजन किया गया। मेले में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान दूर-दराज से आए कई श्रद्धालु कनक दंडवत करते हुए हनुमानजी के दरबार पहुंचे और मन्नतें मांगीं।
56 भोग प्रसादी व मनमोहक फूल बंगला झांकी
मेले के विशेष अवसर पर हनुमानजी की प्रतिमा की सुगंधित फूलों से मनमोहक 'फूल बंगला झांकी' सजाई गई। इसके साथ ही भगवान को 56 भोग का प्रसादी भोग अर्पित किया गया। शाम होते ही पूरा मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा और फूलों की महक से सराबोर हो गया।
पद दंगल में गूंजीं पौराणिक कथाएं व सामाजिक संदेश
ग्रामीण नेमी शर्मा ने बताया कि मेले में आयोजित पद दंगल में कलाकारों ने शिव-पार्वती, राजा हरिश्चंद्र, राजा भर्तृहरि, नरसी का भात तथा रामायण-महाभारत की पौराणिक कथाओं की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। साथ ही, गायन के माध्यम से नशामुक्ति, बालिका शिक्षा और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने का प्रभावी संदेश भी दिया।
भंडारे की पंगत और मेले का उत्साह
कार्यक्रम के तहत आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। मेले में लगी चाट-पकौड़ी, खिलौने, श्रृंगार व घरेलू सामान की दुकानों पर महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की और झूलों का आनंद लिया।
"आस्था, परंपरा और सामाजिक चेतना का प्रतीक बना नीमला का डूंगरी वाला हनुमानजी मेला।"

