कछुआ चाल निर्माण ने तखतगढ़ के व्यापार पर लगाया ब्रेक, पाइपलाइन लीकेज से बढ़ी मुसीबत; दुकानों तक पहुंचना मुश्किल, रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे व्यापारी
तखतगढ़ (बरकत खान) नगर में नेशनल हाईवे-325 से नेहरू रोड तक चल रहा नाला और फुटपाथ निर्माण कार्य स्थानीय व्यापारियों और आमजन के लिए जी का जंजाल बन चुका है। महीनों से जारी इस निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण पूरे इलाके का व्यापारिक आवागमन पूरी तरह चरमरा गया है। निर्माण स्थल पर कार्य पूर्ण होने की न तो कोई समय-सीमा तय है और न ही कोई सूचना पट्ट लगाया गया है, जिससे स्थानीय दुकानदारों में गहरा रोष व्याप्त है।
- रास्ते बंद, ग्राहकों का टोटा; किराएदारों पर दोहरी मार
सड़क के दोनों ओर एक साथ खुदाई कर दिए जाने से ग्राहकों का दुकानों तक पहुंचना दूभर हो गया है। बाजार में कई दुकानदार किराए के भवनों में कारोबार चला रहे हैं। महीनों से ग्राहकी ठप रहने के कारण व्यापारियों के सामने दुकान का किराया निकालना और रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि दोनों तरफ एक साथ काम शुरू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से पहले एक तरफ का निर्माण पूरा कर रास्ता खोला जाना चाहिए था, ताकि आवागमन पूरी तरह बाधित न हो।
- होटल सई लीला के पास फटी पाइपलाइन, सड़कों पर बह रहा पानी
लापरवाही का आलम यह है कि होटल सई लीला के समीप मुख्य पेयजल लाइन पिछले तीन दिनों से टूटी पड़ी है, जिससे हजारों लीटर पानी सड़कों पर बहकर कीचड़ में तब्दील हो रहा है। वहीं एक अन्य स्थान पर पिछले तीन महीनों से लगातार पानी रिसाव की शिकायत है। इस लीकेज के चलते दुकानों के आगे दलदल बन गया है, जिससे पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।
- अधिकारियों की खींचतान, जवाबदेही शून्य
मौके पर जब व्यापारी समस्या को लेकर निर्माण ठेकेदार से बात करते हैं, तो इसे जलदाय विभाग का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। वहीं जलदाय विभाग के कर्मचारी ठेकेदार की लापरवाही बताकर इतिश्री कर लेते हैं। दोनों विभागों की इस आपसी खींचतान में स्थानीय जनता और व्यापारी पिस रहे हैं।
- शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की राह पकड़ेंगे व्यापारी
पीड़ित व्यापारियों और नगरवासियों ने जिला व स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की अंतिम तिथि घोषित करें, टूटी पाइपलाइनों की तुरंत मरम्मत करवाएं और पहले एक तरफ का मार्ग चालू कराएं। यदि शीघ्र ही प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो बाजार बंद कर आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।

