भरतपुर में सेप्टिक टैंक को बायपास कर सीधे सीवर लाइन से जुड़ेंगे शौचालय, आरयूआईडीपी ने की निःशुल्क सीवर कनेक्शन का लाभ उठाने की अपील
भरतपुर, 28 अक्टूबर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय): शहर में राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (RUIDP) के चतुर्थ चरण के तहत सीवरेज सुविधा के प्रसार और इसके उचित रख-रखाव को लेकर आमजन को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जनजागरूकता एवं जनसहभागिता इकाई (CAP) की ओर से प्रिंस नगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर महिला समूहों और शिव नगर स्थित सेंट ल्यूक सेकेंडरी विद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
समय पर कनेक्शन नहीं लेने पर भारी जुर्माने का प्रावधान: आरयूआईडीपी के अधिशाषी अभियंता राजुल कुमार और सीएमई मनोज श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना के प्रावधानों के तहत यदि नागरिक समय रहते घरेलू सीवर कनेक्शन नहीं लेते हैं, तो एमएसडब्ल्यू (MSW) नियमों के तहत 8,000 रुपये कनेक्शन शुल्क और 5,000 रुपये प्रतिदिन की दर से जुर्माना वसूले जाने का प्रावधान है। विभाग ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इन नियमों को ध्यान में रखते हुए समय रहते निःशुल्क सीवर कनेक्शन की प्रक्रिया को पूर्ण करवाएं।
सेप्टिक टैंक को करना होगा बायपास: मोबिलाइजेशन एक्सपर्ट केके शर्मा ने बताया कि सीवर कनेक्शन के दौरान यह बेहद जरूरी है कि शौचालय को सेप्टिक टैंक के माध्यम से जोड़ने के बजाय, सेप्टिक टैंक को बायपास कर सीधे मुख्य सीवर लाइन से जोड़ा जाए, ताकि दूषित जल-मल का उचित और सीधा निस्तारण हो सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि सीवर लाइन में कचरा, गोबर या अन्य ठोस अपशिष्ट बिल्कुल न डालें, जिससे लाइनों में ओवरफ्लो या रुकावट की समस्या न आए।
विद्यार्थियों को भी दी स्वच्छता की सीख: सोशल एक्सपर्ट मनीष कटारा ने बताया कि स्वच्छ भरतपुर के निर्माण में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। अभियान के तहत सेंट ल्यूक स्कूल के विद्यार्थियों को सीवर नेटवर्क से लेकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि कैसे घरों का गंदा पानी शोधित होकर सिंचाई के काम आता है।
कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेनू शाक्य, सरोज, रेखा और श्याम सिंह सहित कई स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। विभाग ने किसी भी समस्या या शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने की बात कही है।

