दातागंज के सराय गांव में पंचतत्व पौधशाला, तालाब और बाग का संत समाज ने शुभारंभ किया
हर साल वितरित होंगे पांच लाख पौधे, विलुप्त हो रहे कमल को मिलेगा नया जीवन
बदायूं (यूपी/अभिषेक वर्मा) दातागंज तहसील क्षेत्र के सराय गांव में सोमवार को पंचतत्व फाउंडेशन द्वारा आयोजित पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। प्रदेश भर के पर्यावरण की अलख जगाने वाले संत समाज की उपस्थिति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वाटर वूमेन के नाम से प्रसिद्ध पर्यावरणविद् शिप्रा पाठक के नेतृत्व में 20 बीघा भूमि पर पंचतत्व पौधशाला, तालाब और एक विशाल बाग की स्थापना की गई।इस मौके पर उपस्थित संतों ने हवन पूजन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया और पर्यावरणीय जागरूकता को धार्मिक चेतना से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
पंचतत्व पौधशाला की विशेषता:पौधशाला से प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख पौधे तैयार किए जाएंगे जिन्हें मुफ्त में वितरित किया जाएगा। यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में हरियाली और जैव विविधता को बढ़ावा देने में सहायक होगी।विलुप्त हो रहे कमल की होगी खेती:इसी परिसर में स्थापित किए गए तालाब में अब विलुप्त हो रहे कमल के फूल की खेती की जाएगी। यह कदम न केवल जैव विविधता की सुरक्षा करेगा बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी पुनर्जीवित करेगा। विशालकाय बाग की नींव रखी गई: तालाब और पौधशाला के साथ एक प्राकृतिक और आयुर्वेदिक पौधों से युक्त बाग भी स्थापित किया गया है, जिसमें विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष और औषधीय पौधों को स्थान दिया जाएगा।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पर्यावरण से सम्बंधित साधु-संतों ने भाग लिया और इस परियोजना को आध्यात्मिक बल प्रदान किया। वैदिक रीति से हुए पूजन और हवन में पर्यावरण रक्षा का संकल्प दोहराया गया।शिप्रा पाठक की पहल: वाटर वूमेन शिप्रा पाठक ने इस मौके पर कहा कि “पर्यावरण जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को एक सूत्र में पिरोकर पंचतत्व की साधना को समाज में जीवंत करना हमारा उद्देश्य है।”इस कार्यक्रम के माध्यम से दातागंज क्षेत्र को एक नई पर्यावरणीय पहचान मिली है। पंचतत्व फाउंडेशन की यह पहल आने वाले वर्षों में न केवल हरियाली को बढ़ावा देगी, बल्कि लोगों के जीवन में प्रकृति के प्रति आदर और संरक्षण की भावना भी उत्पन्न करेगी। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता के रूप में श्री श्री 1008 स्वामी श्री मधुसूदना आचार्य जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी अमृतदास खाकी महाराज ने कहा कि पंचतत्व पौधशाला, तालाब औऱ बाग पर्यावरण संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने वाटर वूमेन शिप्रा पाठक के पर्यावरण संरक्षण के लिए धरातल पर काम करने की लगन व निष्ठा की सराहना की।
कथा वाचक व्यास मुमुक्ष जी महाराज,स्वामी श्री कमल नयन दास पीठाधीश्वर तुलसी मठ ने कहा कि पंचतत्व पौधशाला से हर वर्ष पांच लाख पौधे मुफ्त बांटे जाएंगे, यह वास्तव में शिप्रा पाठक की बहुत बड़ी उपलब्धि औऱ समाज का बड़े स्तर पर हित का कार्य है। इससे नई पीढ़ी भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित व जागरूक होगी।जेसीबी से तालाब की खुदाई के दौरान 6 फीट नीचे गड्ढे में निकली पंचमुखी शिवलिंगजिस दौरान कार्यक्रम चल रहा था वहीं कमल की खेती के लिए जेसीबी से तालाब की खुदाई चल रही थी जिसमें 6 फीट नीचे एक अद्भुत और प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग निकली यह शिवलिंग देखने में अति प्राचीन पंचमुखी और संगमरमर के पत्थर की लग रही है हालांकि शिवलिंग निकलने,निकलने की सूचना पर कई गांव के बच्चे बूढ़े जवान और महिलाएं भी देखने के लिए उमड़ पड़े। हालांकि इस तालाब की खुदाई से पूर्व कई संतों ने मंत्र उच्चारण से पूजन हवन किया था।परमात्मा दास महाराज महंत पापड़ ब्रह्मदेव मंदिर ने बताया कि यह शिवलिंग करीब 300 साल पुरानी और अद्भुत शिवलिंग देखने में लग रही है ।
इस मामले में शैलेश पाठक और शिप्रा पाठक का कहना है कि भक्तों की मांग पर वह भगवान शिव का भव्य और दिव्या मंदिर बनवाएंगे हालांकि पूरा परिवार और आसपास के गांव के लोग शिवलिंग को देखकर बेहद खुश हैं और सावन माह में शिवलिंग निकलना एक चमत्कार से काम नहीं मान रहे हैं । हालांकि इस प्रकार की शिवलिंग मां नर्मदा से प्राप्त होती हैं तो वहीं शिप्रा पाठक भी मां नर्मदा की अनन्य भक्त हैं और वह नर्मदा की परिक्रमा भी कर चुकी हैं।इस मौके पर संजीव रूप महाराज, महामंडलेश्वर संजीव गौढ महाराज रहे एवं अन्य संत समाज जिसमें स्वामी श्री अयोध्या वाले महाराज , काशी वाले महाराज ,स्वामी राघव दास जी, महंत पापड़ वाले महाराज, अंकित दास बाबा महाराज, शिवनाथ महाराज ,श्यामपुरी महाराज ,महांकाल पुरी जी महाराज, रघुनंदन दास जी महाराज ,मदन पुरी जी महाराज, परशुराम गिरी ,सुरेंद्र गिरी,भगवान गिरी, पुजारी अहमद नगर रुखारा, सुरेश गिरी आदि मौजूद रहे ।यज्ञ कार्य को संपन्न करने के लिए आचार्य के रूप में आचार्य देवेंद्र कुमार,आचार्य गौरव मिश्रा , मिश्रा ,आचार्य रवि शंकर द्विवेदी ,आचार्य अभिषेक कुमार त्रिवेदी, आचार्य सुधांशु शर्मा आदि उपस्थित रहे।


