भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 04 अगस्त। अंगदान कर जीवन बचाने एवं दिव्यांगजनों को शारीरिक रूप से सक्षमता के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से कर्नाटक के बीवी नारायण विशेष रूप से डिजाइन की गई मोटरसाइकिल पर विश्वयात्रा पर निकले है। सोमवार को भरतपुर पहुंचकर उन्होंने शहर का भ्रमण कर लोगों से संवाद किया तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर उद्देश्य के बारे में बताया।
आम नागरिक उम्र के इस पडाव में अपनी भागदौड़ भरी जीवन की गति धीमी कर देते हैं, वहीं कर्नाटक के 65 वर्षीय बी.वी. नारायण एक ऐसे उद्देश्य के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जो स्वयं से कहीं बड़ा है। सन् 1979 में साइकिल पर और 2015 में मोटरसाइकिल पर दुनिया के प्रमुख देशों के भ्रमण के बाद, अब वे एक विशेष रूप से डिजाइन की गई दिव्यांग मोटरसाइकिल पर अपनी तीसरी और अंतिम यात्रा पर निकले हैं। जिसका एक गहरा मानवीय उद्देश्य है कि किस प्रकार मानसिक रूप से मृत व्यक्ति के अंगों का समय पर दान कर किसी अन्य व्यक्ति का जीवन बचाकर मानवता की रक्षा कर सकते है।
मध्यम रूप से शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद अत्यंत दृढ़ निश्चयी नारायण अब तक 59 देशों और 1,20,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुके हैं। उनका मिशन केवल साहसिक यात्रा तक सीमित नहीं रहा। यह शारीरिक अक्षमता के प्रति जागरूकता फैलाने, शरीरदान को प्रोत्साहित करने, और वैश्विक शांति और भाईचारे का संदेश देने के लिए रहा है।
वर्तमान में वे कर्नाटक, दिल्ली, पानीपत आदि स्थानों से होते हुए भरतपुर पहुंचकर आगे की यात्रा पर हैं। वे कुल 20 और देशों की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें लगभग 32,000 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। उनका सशक्त संदेश है ’’मृत्यु के बाद भी, हम अंगदान के जरिए जीवन बचा सकते हैं।’’ वे लोगों से आग्रह करते हैं कि वे इस बात को समझें कि कुछ अंग मृत्यु के कई घंटों बाद तक भी उपयोगी रहते हैं और दूसरों की जान बचाने में सहायक हो सकते हैं।
इस नेक कार्य में सहयोग करते हुए नोएडा स्थित स्काई लाइन बजाज इस ऐतिहासिक विश्व यात्रा में उनका समर्थन कर रहा है और उनकी मोटरसाइकिल की नियमित सर्विसिंग कर रहा है। नारायण ऐसे ही उनके इस यात्रा में अलग अलग प्रकार की सहायता अन्य कंपनियों एवं सरकार से भी चाहते हैं। उनका मानना है कि उनकी कहानी और उद्देश्य को मीडिया, सरकार और कॉर्पोरेट प्रायोजन के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि उनकी मोटरसाइकिल पर ब्रांडिंग करना एक अनोखा और प्रभावशाली विज्ञापन माध्यम हो सकता है। जो साथ ही एक मानवीय उद्देश्य को भी समर्थन देगा।
बी.वी. नारायण कहते हैं मैं एक साइकिलिस्ट हूं जिसने दो बार विश्व के अनेक देशों में यात्रा की है एक बार 1997 में साइकिल से और दूसरी बार मोटरसाइकिल से 59 देशों में यात्रा की है। अब मैं अपने जीवन की अंतिम यात्रा पर निकला हूं, एक दिव्यांग मोटरसाइकिल पर, ताकि लोगों को यह बताया जा सके कि कैसे हम विकलांगताओं को रोक सकते हैं, शांति और भाईचारे को बढ़ावा दे सकते हैं, और मृत्यु के बाद शरीरदान द्वारा दूसरों की जान बचा सकते हैं। जीवन समाप्त होने के बाद भी हमारे अंग किसी और को नया जीवन दे सकते हैं।