मुक्ति पर्व देश की स्वतंत्रता के साथ आत्मिक जागृति का पावन पर्व: भक्ति में आजादी की मुक्ति
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता ) राजगढ़ निरंकारी सत्संग भवन पर प्रचार यात्रा पर आए हुए किशनगढ़ के मुखी हर वंश जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मिशन के महान पुरातन संतों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उनको याद किया एवं उन सभी संतो को श्रद्धा सुमन अर्पित किए मुक्ति पर्व की मूल भावना यही है कि जैसे भौतिक स्वतंत्रता हमें राष्ट्र की उन्नति का मार्ग देती है वैसे ही आत्मिक स्वतंत्रता यानी जन्म मरण के चक्र से मुक्ति मानव जीवन की परम उपलब्धि है यह मुक्ति केवल ब्रह्म ज्ञान की दिव्या ज्योत से ही संभव है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है और इस जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराती है।
इस अवसर पर निरंकारी राजापिता ने हजारों श्रद्धालु और भक्तों ने सम्मिलित होकर सद्गुरु के आदेश अनुसार उन महान संत विभूतियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए जिन्होंने मुक्ति मार्ग को प्रशस्त करने हेतु अपना संपूर्ण जीवन ही मानवता की सेवा में अर्पित कर दिया।


