गैस किल्लत पर सियासत के बीच विकास की पहल: CSR-MSME कार्यशाला में योजनाओं की भरमार, लेकिन उद्यमियों की भागीदारी रही नगण्य
भीलवाड़ा, (बृजेश शर्मा) वैश्विक तनाव और गैस किल्लत को लेकर देशभर में जारी सियासी बयानबाजी के बीच भीलवाड़ा में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की कवायद नजर आई। राजस्थान दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन एवं जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र द्वारा पुर रोड स्थित एक निजी होटल में सीएसआर एवं एमएसएमई जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सांसद दामोदर अग्रवाल ने किया, जबकि अध्यक्षता अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रतिभा देवठिया ने की। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
CSR-MSME एकीकरण से विकास को गति देने पर जोर
कार्यक्रम में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के समन्वय को औद्योगिक विकास की नई दिशा बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बड़े उद्योग यदि CSR के तहत MSME इकाइयों के साथ जुड़ें, तो रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
हरित ऊर्जा, स्वच्छता और डिजिटलाइजेशन पर फोकस
कार्यशाला में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया गया। स्वच्छता 4.0 के तहत उद्योगों में साफ-सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं को अपनाने की जरूरत बताई गई। साथ ही डिजिटल इंडिया के तहत तकनीकी अपग्रेडेशन, डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग के लिए उद्यमियों को प्रेरित किया गया।
सांसद ने योजनाओं का लाभ उठाने का किया आह्वान
सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि CSR के माध्यम से सामाजिक विकास और क्षेत्रीय उन्नति को गति दी जा सकती है। उन्होंने उद्योगों से कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं—ओडीओपी, रिप्स, निर्यात प्रोत्साहन, विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना और युवा स्वरोजगार योजना—का उल्लेख करते हुए उद्यमियों से इनका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
औद्योगिक नीतियों और योजनाओं की दी जानकारी
जिला उद्योग केंद्र के संयुक्त आयुक्त के.के. मीणा ने कहा कि CSR उद्योगों की सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। कार्यक्रम में MSME पॉलिसी 2024, राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024, राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम 2024 और डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित-आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
उद्योग-प्रशासन समन्वय पर जोर
अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रतिभा देवठिया ने उद्यमियों से औद्योगिक नीतियों का लाभ लेने और CSR के माध्यम से जिले के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम में मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, विभागीय अधिकारियों और उद्यमियों ने भाग लिया।
प्रचार-प्रसार की कमी, उद्यमियों की कम रुचि
इतने महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित कार्यशाला में उद्यमियों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही। कई सीटें खाली नजर आईं। उद्यमियों का कहना था कि कार्यक्रम का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण अधिकतर लोगों तक इसकी जानकारी ही नहीं पहुंच सकी।
उन्होंने यह भी बताया कि श्रम विभाग और सरकार की कई योजनाओं की जानकारी आमजन तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है, जिससे इनका लाभ सीमित लोगों तक ही सिमट कर रह जाता है।
विशेषज्ञों से मिला मार्गदर्शन, किट का वितरण
कार्यक्रम के दौरान उद्यमियों ने विभिन्न योजनाओं से जुड़े प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मानद महासचिव आर.के. जैन ने उद्योग और शासन के बीच समन्वय पर विचार रखे। अंत में प्रतिभागियों को योजनाओं के ब्रोशर एवं जानकारी किट वितरित कर आभार व्यक्त किया गया।
सकारात्मक, लेकिन जमीनी पहुंच जरूरी
कार्यशाला ने जहां CSR और MSME के समन्वय से विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया, वहीं उद्यमियों की कम भागीदारी और प्रचार-प्रसार की कमी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।