गणगौर की भक्ति में रंगा भीलवाड़ा: ईसर-गौरा पूजन से गूंजे लोकगीत, सड़कों पर उमड़ा आस्था का सैलाब
भीलवाड़ा (बृजेश शर्मा) चैत्र शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर गणगौर का पवित्र पर्व जिलेभर में श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह होते ही शहर से लेकर गांवों तक सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं में खासा उत्साह देखने को मिला। रंग-बिरंगी राजस्थानी वेशभूषा, हाथों में मेहंदी, सोलह श्रृंगार से सजी महिलाओं ने ईसर-गौरा का विधिवत पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की मंगल कामनाएं की।
शहर के विभिन्न मोहल्लों, मंदिरों और सामुदायिक स्थलों पर गणगौर माता की विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों— “खेले गणगौर माता खेले” और “पूजण द्यो गणगौर”—की मधुर स्वर लहरियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोलक की थाप और लोकगीतों की गूंज से पूरा शहर धर्म और संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
पूजन के दौरान महिलाओं ने दूब, पुष्प और पारंपरिक सामग्री से ईसर-गौरा की आराधना की तथा विविध प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों का भोग अर्पित किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर एकजुटता और सांस्कृतिक परंपरा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
दोपहर बाद शहर के प्रमुख मार्गों से ईसर-गौरा की भव्य सवारी निकाली गई। सजी-धजी झांकियों, बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ निकली इस शोभायात्रा ने पूरे शहर को उत्सवमय बना दिया। श्रद्धालुओं का जनसैलाब सड़कों के दोनों ओर उमड़ पड़ा और हर कोई इस दिव्य सवारी के दर्शन को आतुर नजर आया।
गणगौर का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। पूरे भीलवाड़ा में दिनभर भक्ति, उत्साह और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।