पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गणगौर पर्व; महिलाओं ने ईसर-गौर की पूजा कर सुख-समृद्धि के लिए कामना की
नारायणपुर उपखण्ड क्षेत्र में शनिवार को गणगौर का पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांव की हर गली-मोहल्ले में उत्सव की रौनक दिखाई दी। इस पर्व में महिलाओं और बालिकाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान लड़कियों ने सोलह श्रृंगार कर माता गौरी और भगवान ईसर, शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सोशियल चेंजमेकर गायत्री शर्मा ने बताया कि पारंपरिक गणगौर गीत गाकर माता की पूजा की जाती है। नई दुल्हनें होली के दूसरे दिन धूलंडी से लेकर 16 दिन तक ईशर गौर की पूजा करती है एवं गणगौर के शाम को कुएं में विसर्जन करती है। गांव की चौपालों और मंदिरों में महिलाओं व युवतियों के समूह एकत्रित हुए। उन्होंने पारंपरिक गणगौर गीत गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कई जगहों पर मिट्टी से बनी ईसर-गौर की सुंदर प्रतिमाओं को रंग-बिरंगे कपड़ों, फूलों और आभूषणों से सजाया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहीं। इस उत्सव में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने हिस्सा लिया, जो अपनी संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है। ग्रामीणों का मानना है कि गणगौर केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। शाम के समय पूजा संपन्न होने के बाद, महिलाओं और बालिकाओं ने समूह में पारंपरिक गीत गाते हुए गणगौर माता को विदाई दी। डीजे की धुन पर लोकगीतों की गूंज से पूरा गांव उत्सव के रंग में रंगा रहा।