कठूमर के ऐतिहासिक गणगौर मेले का हुआ आगाज; ईसर गौरा की सवारी देखने हजारो लोग उमडे, विधायक ने ध्वजपूजन कर मेले की औपचारिक शुरुआत की
कठूमर (दिनेश लेखी) कस्बे का ऐतिहासिक दो दिवसीय गणगौर मेला सोमवार को पूरे उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ शुरू हुआ। शाम करीब चार बजे लक्ष्मणगढ़ बस स्टैंड से ईसर-गौरा की भव्य सवारी निकाली गई, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी उमड़ पड़े। मुख्य बाजार, गलियां और मकानों की छतें दर्शकों से खचाखच भरी नजर आईं। हर ओर ढोल-नगाड़ों, लोकगीतों और जयकारों की गूंज से पूरा कस्बा भक्तिमय और उत्सवमय माहौल में रंग गया।
नगरपालिका ईओ विक्रांत शर्मा ने बताया कि सवारी से पूर्व अतिथियों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर ईसर-गौरा की प्रतिमाओं को रथ में विराजित किया गया। इसके बाद शोभायात्रा को रवाना किया गया। शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत घोड़ियों का नृत्य विशेष आकर्षण रहा, जिसे देखने के लिए लोग घंटों तक डटे रहे।
शोभायात्रा में ढोला-मारू, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, पाताल अघोरी, बाहुबली हनुमान, खाटूश्यामजी, कच्ची घोड़ी, शिव बारात, परशुराम सहित दो दर्जन से अधिक झांकियां शामिल रहीं। इन झांकियों ने धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न समाजों द्वारा प्रस्तुत शिक्षाप्रद झांकियों ने सामाजिक संदेश भी दिए, जिनकी दर्शकों ने खूब सराहना की। मुख्य बाजार में बम रसिया दलों की लोक गायकी और लोकनृत्य ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया। कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे और देर तक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग इन कार्यक्रमों का आनंद लेने पहुंचे।
मेले में बच्चों के लिए झूले, चकरी और अन्य मनोरंजन के साधनों पर खासा उत्साह देखने को मिला। वहीं महिलाओं और युवतियों ने सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर खरीदारी की। चाट-पकौड़ी, मिठाई और अन्य खानपान की दुकानों पर भी लोगों की भारी भीड़ रही, जिससे व्यापारियों के चेहरे खिले नजर आए। मेले में सामाजिक सरोकार भी देखने को मिले। जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं और भामाशाहों द्वारा पेयजल, शरबत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई, जिससे गर्मी में आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिली। इससे पूर्व सोमवार सुबह मेला ग्राउंड में विधायक रमेश खींची ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर ध्वजारोहण के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ किया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गणगौर मेला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और इसे सहेजकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कोई लापरवाही न बरती जाए तथा असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कार्यक्रम में क्षेत्र के सरपंच, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और मेला कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। नगरपालिका प्रशासन द्वारा पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई, वहीं पुलिस प्रशासन ने एसएचओ सुनील टांक के नेतृत्व में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा।
आज के कार्यक्रम मेले के दूसरे दिन हौद वाली बगीची में पारंपरिक कुश्ती दंगल का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दराज से पहलवान भाग लेंगे। इसके साथ ही रात्रि में विजेंद्र सिंह मेला ग्राउंड पर भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध कवि अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मनोरंजन करेंगे।