बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के उपाय -खंड मुख चिकित्सा अधिकारी
लक्ष्मणगढ (अलवर) कमलेश जैन
बारिश के मौसम की बीमारियाँ जिनकी वजह से हर साल जून से सितंबर तक सबसे ज़्यादा हॉस्पिटल मरीज को आना पड़ता है।
बारिश के मौसम में नमी, जलभराव और तापमान में बदलाव के कारण बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस दौरान मुख्य रूप से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, डायरिया (उल्टी-दस्त), पीलिया हेपेटाइटिस-ए और त्वचा (फंगल) संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
वायरल फीवर बारिश के मौसम में होने वाली सबसे आम बीमारी है । अचानक बुखार, थकान और शरीर में दर्द — आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन 48 घंटे से ज़्यादा बुखार रहने पर जांच की ज़रूरत होती है। लापरवाही न करें।
मच्छर जनित बीमारियों से बचाव (डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया
पानी जमा न होने दें: घर के आसपास, कूलर, गमलों या टायरों में पानी इकट्ठा न होने दें ताकि मच्छरों को पनपने की जगह न मिले।
पूरी बाजू के कपड़े पहनें: मच्छरों से बचने के लिए शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें और सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें।
जल जनित और पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाव टाइफाइड, डायरिया, पीलिया
उबला हुआ पानी पीएं: पानी हमेशा फिल्टर किया हुआ या उबालकर ही पीएं। बाहर का दूषित पानी पीने से बचें।
ताजा खाना खाएं: बासी खाना और खुले में कटे हुए फलों के सेवन से बचें। हमेशा घर का बना ताजा और गर्म खाना खाएं।
त्वचा/फंगल संक्रमण से बचाव
त्वचा को सूखा रखें: बारिश में भीगने के बाद खुद को अच्छे से सुखाएं। लंबे समय तक गीले मोजे या जूते पहनने से बचें।
साफ-सफाई बनाए रखें: घर में सीलन न होने दें। पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें और बाहर से आने के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोएं।
स्वास्थ्य और खान-पान का महत्व
इम्युनिटी बढ़ाएं: अपनी डाइट में विटामिन-सी से भरपूर फल, गिलोय, हल्दी का दूध, और अदरक वाली चाय शामिल करें।
चिकित्सक की सलाह: यदि तेज बुखार, लगातार उल्टियां, दस्त या पीलिया के लक्षण दिखें, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत किसी डॉक्टर से परामर्श लें।


