पॉलीथिन की थैलियां बन रही है सफाई में परेशानी का सबब, पर्यावरण को भी पहुंच रहा नुकसान
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) प्रदेश भर में लगे पॉलीथीन बैन के बावजूद कस्बे सहित तहसील क्षेत्र में इनका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। जिसके कारण ना केवल पर्यावरण को खतरा पैदा हो रहा है, बल्कि कस्बे की सफाई व्यवस्था प्रभावित सहित पशुधन को भी हानि हो रही है। बेसहारा पशुधन खाने-पीने की सामग्री के साथ इनका सेवन कर लेते है। इससे पशुओं में बीमारियां हो रही है। सिंगल टाइम यूज प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर सरकार ने पूर्ण रूप से रोक लगा दी है, इसके बावजूद बेरोकटोक बिक्री से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सफाई व्यवस्था चरमराने में भी इसका बड़ा हाथ है। इससे पर्यावरण को भी काफी नुकसान हो रहा है। क्षेत्र के गांवों में भी पॉलीथिन की थैलियों का प्रचलन जोरों पर है। कस्बे में घूमने वाले बेसहारा पशुओं को इससे खतरा है। लोग घरों में बचने वाली झूठन सामग्री को इसमें डालकर फेंक देते हैं। इसे पशु खा लेते हैं पशुओं के पेट में जाकर यह पॉलीथिन की थैलियां उनकी पाचन शक्ति के प्रभावित करती है। जिससे पशुधन को बीमारियां हो रही है। विशेषकर गोवंश के लिए यह कैरी बैग मौत का सामान बन रहा है।
आवारा पशुओं की भरमार जहां एख तरफ कस्बें में पॉलीथीन की वजह से सफाई व्यवस्था चरमराने लगी है , वही कस्बे में आवारा पशुओं के कारण लोग परेशान है। ये पशुधन भगवान भरोसे होने से उनको खान-पीने को कुछ नहीं मिलता है। भूखा पशुधन कचरे में मुंह मारता है और वहां खाने के साथ पॉलीथिन की थैलियां भी उनके पेट में जा रही है।
सख्ती से लागू हो प्रतिबंध
कैरी बैग पर प्रतिबंध सख्ती से लागू होना चाहिए। इससे गोवंश सहित कस्बे की सफाई व्यवस्था भी को खतरा पैदा हो रहा है। प्रशासन सख्ती दिखाए तभी इस पर लगाम लग सकती है।समाजसेवीओ का कहना है कि, पॉलीथिन की थैलियों के उपयोग पर रोक लगनी चाहिए। सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है।
नागरिकों को भी लानी होगी जागृति ... आम नागरिक पॉलीथिन के दुष्प्रभावों से परिचित होने के बावजूद इसका उपयोग बंद नहीं कर रहे। चाय के कप, पानी की बोतलें और खरीदारी के बाद थैलियां खुले में फेंक दी जाती है, जो धीरे-धीरे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जहर बन रही है। भूमि और पानी भी हो रहा खराब पॉलीथिन को जमीन में दबाने से मिट्टी की उर्वरता खत्म होती है और भूजल दूषित होता है।
नालियां जाम, बढ़ता जलभरावः कस्बे के कई हिस्सों में नाले-नालियां पॉलीथिन से अटे पड़े है। लोग घर का कचरा पॉलीथिन में भरकर नालियों में डालते हैं, जिससे जल निकासी बाधित होती है। बरसात में यही स्थिति जलभराब और गंदगी को बढ़ावा देती है।
लोगों के जीवन पर पड़ रहा असर : पॉलीथिन थैलियों से जल और मिट्टी दूषित होती है। नालियां जाम होने से जलभराव हो जाता है। जिससे नाली एवं बारिश के गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अनेक बीमारियों का फैलने का अंदेशा बना रहता है।

