7 यात्रियों से पूरा किराया लिया, टिकट नहीं दिया: वैर में चेकिंग के दौरान खुलासा, रोडवेज परिचालक निलंबित
बयाना-जयपुर मार्ग पर चल रही भरतपुर आगार की बस में कार्रवाई; सातों यात्रियों ने दोबारा पेनल्टी देने से किया इनकार, परिचालक को निलंबित कर धौलपुर भेजा
भरतपुर/वैर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भरतपुर आगार की रोडवेज बस में चेकिंग के दौरान यात्रियों से पूरा किराया वसूलने के बावजूद टिकट जारी नहीं करने का गंभीर मामला सामने आया है। वैर में हुई चेकिंग के दौरान बस में सात यात्री बिना टिकट मिले। जांच में सामने आया कि इन यात्रियों से परिचालक द्वारा पूरा किराया पहले ही लिया जा चुका था, लेकिन उन्हें टिकट जारी नहीं की गई।
मामले को गंभीर मानते हुए चेकिंग टीम ने मौके पर रेडमार्क केस तैयार किया और कार्रवाई की रिपोर्ट रोडवेज मुख्यालय भेजी। रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय ने परिचालक गजेन्द्र सिंह यादव को निलंबित कर धौलपुर भेज दिया।
बयाना से जयपुर जा रही थी बस
भरतपुर आगार के यातायात प्रबंधक पीयूष अवस्थी के अनुसार, गत दिवस बस संख्या RJ-05 PA-6896 बयाना से जयपुर के लिए रवाना हुई थी। बस में अनुबंधित चालक रवि कुमार और परिचालक गजेन्द्र सिंह यादव ड्यूटी पर तैनात थे। बस के वैर पहुंचने पर डिपो की चेकिंग टीम ने उसे रुकवाया और यात्रियों तथा टिकट व्यवस्था की जांच शुरू की।
जांच में 7 यात्री बिना टिकट मिले
चेकिंग के दौरान टीम को बस में सात यात्री बिना टिकट यात्रा करते मिले। यात्रियों से टिकट के संबंध में पूछताछ करने पर सामने आया कि उन्होंने अपना पूरा किराया परिचालक को दे दिया था, लेकिन उन्हें टिकट जारी नहीं की गई।
इससे मामला सामान्य बिना टिकट यात्रा से अलग और गंभीर हो गया, क्योंकि यात्रियों के अनुसार वे अपनी यात्रा का किराया पहले ही चुका चुके थे।
यात्रियों ने पेनल्टी देने से किया इनकार
चेकिंग टीम ने सातों यात्रियों को बिना टिकट यात्रा के संबंध में नियमानुसार अधिभार/पेनल्टी की जानकारी दी। इस पर यात्रियों ने अतिरिक्त राशि देने से इनकार कर दिया।
यात्रियों का कहना था कि वे पहले ही परिचालक को पूरा किराया दे चुके हैं, ऐसे में अब दोबारा राशि क्यों दें। बताया गया कि यात्रियों ने अपना नाम, पता और लिखित बयान देने से भी इनकार कर दिया। चेकिंग टीम ने यात्रियों के बयान नहीं देने की स्थिति को भी कार्रवाई के रिकॉर्ड में दर्ज किया।
ईटीआईएम मशीन से तैयार हुआ रेडमार्क केस
मामले में चेकिंग दल ने ईटीआईएम मशीन के माध्यम से रेडमार्क केस की दो प्रतियां तैयार कीं। दोनों प्रतियों पर चेकिंग अधिकारियों के साथ चालक और परिचालक के हस्ताक्षर कराए गए। इस कार्रवाई के जरिए बिना टिकट यात्रा और किराया लेने के बावजूद टिकट जारी नहीं करने की स्थिति को मौके पर ही विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
चेकिंग टीम में ये अधिकारी रहे शामिल
वैर में बस की जांच करने वाली टीम में मुख्य प्रबंधक कुलदीप सिंह, प्रबंधक यातायात पीयूष अवस्थी और मेकैनिक ग्रेड-1 राजेश गुप्ता शामिल रहे। टीम ने मौके पर कार्रवाई पूरी कर इसकी रिपोर्ट विभागीय कार्रवाई के लिए मुख्यालय भेजी।
रिपोर्ट पहुंचते ही परिचालक निलंबित
चेकिंग टीम की रिपोर्ट मुख्यालय पहुंचने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। मुख्यालय के आदेश के बाद परिचालक गजेन्द्र सिंह यादव को निलंबित कर धौलपुर भेज दिया गया। अब विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई और जांच में यह देखा जाएगा कि सात यात्रियों से किराया लेने के बावजूद टिकट जारी क्यों नहीं की गई और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।
सबसे बड़ा सवाल—किराया लिया तो टिकट क्यों नहीं दी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सातों यात्रियों से पूरा किराया वसूल लिया गया था, तो उन्हें ईटीआईएम मशीन से टिकट क्यों जारी नहीं की गई। रोडवेज में किराया लेने के बाद यात्री को टिकट देना यात्रा के रिकॉर्ड और राजस्व लेखे के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किराया लेने के बावजूद टिकट जारी नहीं करना विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितता माना जा सकता है। चेकिंग के दौरान तैयार किए गए रेडमार्क केस और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर अब विभागीय जांच में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

