परिस्थितियां कैसी भी आए, भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए : संत जीवण राम
खैरथल (हीरालाल भूरानी) कस्बे के आनन्द नगर के विजय पार्क में चल रहे सत्संग के दौरान बाबा आयाराम दरबार के गद्दी नशीन संत जीवणराम उर्फ श्याम बाबा ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सदैव अपने भक्तों का साथ निभाते हैं। वह सच्चा प्रेम करने वालों का भी साथ देते हैं।
भगवान की भक्ति करने वाला व्यक्ति किसी भी युग में निराश नहीं होता। परिस्थितियां कैसी भी हों, भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। सच्ची भक्ति व्यक्ति को मानसिक शांति और संतोष प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के पास जितनी अधिक धन-संपदा आती है, उसकी तृष्णा भी उतनी ही बढ़ती जाती है। मनुष्य कितना भी धनवान क्यों न हो, उसे किसी न किसी चीज की कमी महसूस होती रहती है। उन्होंने कहा कि तुलना करने की प्रवृत्ति से ही कमी का भाव पैदा होता है। यही भाव आगे चलकर तृष्णा को जन्म देता है। यदि धन की कमी ही असंतोष का कारण होती तो साधु-संत और फकीर भी हमेशा परेशान रहते। सीमित साधनों में रहने वाला संतोषी व्यक्ति भी प्रसन्न रह सकता है। जीवन में धन के पीछे लगातार भागने की बजाय संतोष, विवेक और भक्ति को महत्व देना चाहिए।
श्याम बाबा ने कहा कि कथा का वास्तविक लाभ तभी है, जब उसे केवल सुना ही न जाए। उसमें बताए गए संदेश को जीवन में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में कई बार अच्छे कार्य करने के अवसर मिलते हैं। कई बार वह उन अवसरों को पहचान नहीं पाता। वह गलत कार्यों की ओर बढ़ जाता है।
ऐसे में व्यक्ति को विवेक से काम लेना चाहिए। उसे अच्छे कमों का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा को अमृत के समान है। इसे जितनी बार सुना जाए, उतना ही अधिक आध्यात्मिक आनंद मिलता है। जैसे आम का स्वाद बार-बार लेने पर भी आनंद देता है, उसी प्रकार भागवत कथा का श्रवण भी बार-बार करने पर मन को आनंद और शांति देता है।
श्याम बाबा ने कहा कि नई पीढ़ी को धार्मिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना परिवार की जिम्मेदारी है। बच्चों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों की जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से धार्मिक आयोजनों में युवाओं को साथ लेकर आने का आह्वान किया। भारतीय संस्कृति से परिचित होने से युवाओं के आचरण और सोच में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

