यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर व्यापारियों ने कहा अब हम नगद भुगतान को बढ़ावा देंगे
लक्ष्मणगढ़ अलवर/ कमलेश जैन) यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर व्यापार संगठनों में नाराजगी देखने को मिली है। 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क लगाने के सरकार के फैसले के बाद कस्बे के कई कारोबारी संगठनों ने कहां कि अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए वे ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की बजाय नकद लेनदेन के लिए ही कहेंगे।
15 अक्टूबर से शुरू हुई, नई व्यवस्था के अनुसार, 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये तक शुल्क वसूला जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि इससे कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
नकद भुगतान को बढ़ावा देंगे वस्त्र व्यापार संघ अध्यक्ष
वस्त्र व्यापार अध्यक्ष मनीष जैन ने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकार की पहल का समर्थन किया था। लेकिन अगर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे नकद भुगतान को प्रोत्साहित करेंगे। जैन ने कहा की हम पहले से ही लेनदेन शुल्क और 18 प्रतिशत जीएसटी (माल एवं सेवा कर) दे रहे हैं। अब अगर सरकार हमसे यूपीआई एमडीआर भी वसूलती है तो हम इसका समर्थन नहीं करेंगे। और नकद भुगतान को बढ़ावा देना शुरू करेंगे।
पार्ट्स विक्रेता नितिन खुराना ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क के इस निर्णय के बाद अब कम मुनाफे पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यूपीआई भुगतान महंगा विकल्प बन जाएगा।
इधर, किराना व्यापार संघ के अशोक गाबा
ने कहा कि सरकार के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के फैसले से त्योहारों से पहले छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में हुई प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सरकार ने 15 अक्टूबर से कारोबारियों या दुकानदारों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। इस शुल्क का भुगतान व्यापारी को करना होगा। यह शुल्क स्थानीय सबसे छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में वर्षों में हुई प्रगति को पीछे धकेल सकता है। वह भी ठीक ऐसे समय जब त्योहारों का सीजन आने वाला है।
गंगा लहरी प्रजापत ने कहा छोटे व्यापारी अब यह सोचेंगे कि नकदी स्वीकार करें या यूपीआई से इससे हम जैसे छोटे दुकानदारों के लिए नगद भुगतान लेना ही मजबूरी होगी। यूपीआई चार्ज लगाने को आम जनता और छोटे व्यापारियों के खिलाफ बताया।
आम नागरिकों का कहना है कि लोगों में डिजिटल पेमेंट की सरकारआदत डालती है, और फिर उस पर ही चार्ज लगा देती है।
अधिकांश लोगों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा सरकार ने पहले तो लोगों को फोन से पेमेंट करने, आसानी से पैसे ट्रांसफर करने और आसान डिलीवरी की आदत डाली, और अब चार्ज लगा रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के शहर अध्यक्ष मास्टर छोटेलाल ने कहा कि GST और नोटबंदी के समय भी ऐसा ही हुआ था। अगर 2014 से अब तक की हर चीज को देखें तो लोगों के फायदे के लिए क्या काम हुआ है? अगर लोगों को फायदा हो रहा होता तो गरीबी और मुश्किलें नहीं बढ़तीं, और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में भी समस्याएं नहीं होतीं।
उन्होंने कहा सड़क किनारे एक छोटी सी किराने की दुकान है। इलाके के लोग उस दुकानदार से सरसों का तेल, दाल, नमक, प्याज, मसाला और दूसरी चीजें खरीदते हैं। उसे दाल पर सिर्फ 2 रुपए और दूध पर 1 रुपए का लाभ मिलता है। ऐसे में छोटे दुकानदारों के लिए नगद भुगतान लेना ही संभव होगा।

