बावड़ी (जोधपुर) में आदर्श विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन आयोजित: संस्कारयुक्त शिक्षा और बाल-केंद्रित विकास पर जोर, माताओं की भूमिका को बताया अहम
बावड़ी (जोधपुर) मिश्रीलाल लखारा
कस्बे के आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संस्कारयुक्त शिक्षा और विद्यालय-अभिभावक समन्वय को लेकर एक भव्य मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारी संख्या में माताओं, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
संस्कार और बाल-केंद्रित शिक्षा पर विशेष फोकस
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी घेवरराम और अध्यक्षता कर रही पप्पू देवी विश्नोई की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। सम्मेलन में बच्चों की शिक्षा, व्यक्तित्व निर्माण और उनके समग्र विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य बौद्धिक वक्ता, विद्या भारती शिक्षण संस्थान के जिला सचिव संग्राम सिंह ने माताओं और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल-केंद्रित शिक्षा आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर अनुशासन, आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों का बीजारोपण करना भी विद्यालय और परिवार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे की जिज्ञासा और क्षमता को केंद्र मानकर शिक्षा दी जाती है, तो उसका नैतिक और बौद्धिक विकास बेहतरीन तरीके से होता है।
माता की भूमिका और परिवार का समन्वय
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे का प्रथम विद्यालय उसका परिवार होता है और माता उसकी प्रथम शिक्षिका होती है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार और विद्यालय के बीच निरंतर संवाद व सहयोग बेहद जरूरी है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाते हुए अभिभावकों को बच्चों की शैक्षणिक प्रक्रिया से सक्रिय रूप से जोड़ना था। कार्यक्रम के अंत में घर, विद्यालय और समाज की संयुक्त भूमिका को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

