गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में भाजपा का परचम: ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने चौथी बार दर्ज की ऐतिहासिक जीत
गोरखपुर (शशि जायसवाल):
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद (MLC) सीट पर लगभग 32 से 35 घंटे तक चली मैराथन मतगणना के बाद नतीजों का ऐलान कर दिया गया है। इस बेहद कड़े और रोमांचक मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 मतों के सूक्ष्म अंतर से पराजित कर जीत का परचम लहराया।
लगातार चौथी बार बने MLC, भाजपा के टिकट पर पहली जीत: इस जीत के साथ ही ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने लगातार चौथी बार विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होकर इतिहास रचा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले के तीनों चुनावों में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते थे, जबकि इस बार वे पहली बार भारतीय जनता पार्टी के सिंबल पर मैदान में उतरे थे।
307 वोटों के कड़े अंतर से हुआ फैसला: घोषित अंतिम चुनाव परिणाम के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को कुल 14,887 मत प्राप्त हुए, वहीं कड़ी टक्कर दे रहे निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के खाते में 14,580 मत आए। प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती में ध्रुव त्रिपाठी 11,881 वोट लेकर 466 वोटों से आगे चल रहे थे, जिसके बाद दूसरी वरीयता की गिनती में दोनों प्रत्याशियों के बीच अंतर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
मतगणना पर विवाद: राजीव यादव ने मांगी फोरेंसिक जांच: परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव प्रक्रिया और मतगणना की निष्पक्षता को लेकर विवाद शुरू हो गया है। निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए चौथे राउंड में गिने गए 1,612 मतों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग एक हजार वोटों की हेराफेरी की गई है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग और अदालत (कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
11 सीटों में से भाजपा के खाते में आईं 6 सीटें: उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनावों में भाजपा ने 6 सीटों पर परचम लहराया है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) को 3 सीटों पर सफलता मिली है। वहीं वाराणसी शिक्षक सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल, गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर राजीव यादव द्वारा कानूनी कार्रवाई के ऐलान के बाद सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

