मकरान में अकीदत और रूहानी माहौल के बीच संपन्न हुआ 'जश्ने गौसुलवरा'
मकराना (मोहम्मद शहजाद)
शहर के मेवलियाबड़ क्षेत्र में बुधवार की रात मरहूम हाजी लियाकत अली भाटी के ईसाले सवाब के लिए 'जश्ने गौसुलवरा कॉन्फ्रेंस' पूरी अकीदत, एहतराम और रूहानी शान के साथ आयोजित की गई। 'तंज़ीम अइम्माए मसाजिद अहले सुन्नत मकराना' की ज़ेरे निगरानी हुए इस भव्य जलसे का आगाज़ बाद नमाज़-ए-इशा कुरआन-ए-पाक की तिलावत के साथ कारी मोहम्मद आसिफ रजा ने किया।
'सच्ची कामयाबी शरीयत पर चलने में' — कादरी मियां
जलसे में विशेष मेहमान (मेहमान-ए-खुसूसी) के तौर पर मखदूम अशरफ मिशन पंडवा शरीफ (मालदा, बंगाल) के सरवरा-ए-आला, पीर-ए-तरीकत हज़रत अल्लामा मौलाना अशशाह डॉ. सय्यद जलालुद्दीन अशरफ अशरफी उल जिलानी (कादरी मियां) ने शिरकत की। अपने रूहानी खिताब में उन्होंने हज़रत गौसे आज़म शैख़ अब्दुल कादिर जिलानी की हयात, उनकी कठिन रियाज़तों, इबादत और दीनी तालीमात पर विस्तार से रोशनी डाली।
उन्होंने फरमाया कि "सच्ची कामयाबी शरीयत-ए-मुस्तफा पर पाबंदी से अमल करने, दिल को पाक-साफ रखने और गुनाहों से सच्ची तौबा करने में ही निहित है।" उन्होंने यह भी कहा कि इस दुनिया से रुखसत हो चुके अज़ीज़ों के लिए सबसे बेहतरीन तोहफा उनके हक में नेक अमल और मगफिरत की दुआ है।
उलेमा-ए-किराम के प्रेरणादायक संबोधन
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खुसूसी खतीब हज़रत अल्लामा मौलाना हनीफ साहब रजवी शेरानी आबाद ने ज़िंदगी व मौत के फलसफे, ईमान की हिफाज़त और मरहूम की दीनी खिदमात का विशेष ज़िक्र किया।
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खतीब-ए-नौजवान हज़रत अल्लामा मौलाना असलम रब्बानी ने अल्लाह के खौफ, फिक्र-ए-आखिरत और अहले बैत की मोहब्बत को अपनाने पर ज़ोर दिया।
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मौलाना मुहम्मद रमज़ान बरकाती ने ईमान की सलामती और नेकियों की अहमियत को रेखांकित किया।
नातिया कलाम और सुरीली प्रस्तुतियां
जलसे के दौरान नातख्वां कारी मोहम्मद शरीफ बासनी ने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और मखदूम पाक की शान में बेहतरीन नातिया कलाम व मनकबत पेश कर सामीइन (श्रोताओं) को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा अमीन बरकाती, मौलाना बरकत अली अशरफी और हाफिज रमज़ान अत्तारी ने भी अपनी सुरीली आवाज़ में कलाम पेश किए। कार्यक्रम की बेहतरीन निज़ामत कारी असगर रज़ा साहब ने अदा की।
स्वागत-सत्कार और दुआ-ए-खैर
इस रूहानी आयोजन में मौलाना जावेद साहब बासनी, मौलाना तकमील अहमद, मौलाना हन्नान साहब सहित बड़ी तादाद में उलेमा-ए-किराम, अइम्मा साहिबान और शहर के कोने-कोने से आए अकीदतमंद मौजूद रहे।
जलसे के आरंभ में शहादत अली भाटी, मुनव्वर भाटी, अनवर भाटी व अन्य परिजनों ने आए हुए मेहमान उलेमा का इस्तकबाल कर उनकी गुलपोशी की। कार्यक्रम के अंत में बारगाह-ए-रिसालत में सलात-ओ-سلام पेश किया गया, जिसके बाद डॉ. सय्यद जलालुद्दीन अशरफ (कादरी मियां) ने मुल्क में अमन-ओ-अमान, भाईचारे, तरक्की और मरहूम हाजी लियाकत अली भाटी की मगफिरत के लिए विशेष (खुसूसी) दुआ कराई।

