श्री राजर्षि अभय समाज द्वारा नाटक 'महाराजा भर्तृहरि' का भव्य मंचन: बेताल का वध कर प्रजा को दिलाया अभय
अलवर (अनिल कुमार गुप्ता)
पारसी रंगमंच शैली पर आधारित एकमात्र ऐतिहासिक संस्था 'श्री राजर्षि अभय समाज, अलवर' द्वारा महाराजा भर्तृहरि के जीवन पर आधारित एक भव्य नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से महाराजा भर्तृहरि द्वारा उज्जैन राज्य के कुशल संचालन और आसुरी शक्तियों के अंत की गाथा को मंच पर बड़े ही जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
बेताल का वध कर प्रजा को दी असुरक्षा से मुक्ति
नाटक के दृश्य में दिखाया गया कि उज्जैन राज्य में 'बेताल' नामक एक आसुरी शक्ति का आतंक फैल जाता है, जिससे पूरी प्रजा में डर और असुरक्षा का माहौल बन जाता है। जब राजा भर्तृहरि को इसका पता चलता है, तो वे स्वयं भयंकर जंगल में जाकर बेताल से युद्ध करते हैं और उसका वध कर प्रजा को उसके खौफ से मुक्ति दिलाते हैं।
महारानी पिंगला ने वेश बदलकर बचाए पति के प्राण
बेताल के वध के बाद उसकी पत्नी 'बेताली' अपने पति की मौत का प्रतिशोध लेने के लिए महाराजा भर्तृहरि पर हमला कर देती है। उसी समय एक साहसी युवक वहां पहुंचकर महाराजा के प्राणों की रक्षा करता है। वास्तव में वह युवक कोई और नहीं, बल्कि उनकी धर्मपत्नी महारानी पिंगला थीं, जो अपना वेश बदलकर महाराजा से मिलने उस भयंकर जंगल में आई थीं।
श्रृंगार रस और दर्शकों का रोमांच
नाटक में विवाह के पश्चात महाराजा भर्तृहरि और महारानी पिंगला का यह पहला मिलन दिखाया गया, जिसके बाद से महाराजा भर्तृहरि के जीवन में श्रृंगार रस का प्रवेश होता है। राजा और रानी के इस अद्भुत मिलन दृश्य ने पंडाल में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनियों और "महाराजा भर्तृहरि की जय" के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान कर दिया।

