ग्रामीण उद्यमिता कृषि विकास जागरूकता अभियान :फलदार बगीचों में कीट, बीमारी एवं खरपतवार की रोकथाम के उपाय बताए
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 06 अगस्त। कृषि महाविद्यालय भुसावर पर ग्रामीण उद्यमिता कृषि विकास जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों को अगस्त माह के कृषि कार्यो से अवगत कराया गया।
महाविद्यालय के डीन डॉ. उदय भान सिंह ने बताया कि अगस्त माह फलदार बगीचों के लिए अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्षा ऋतु में पौधों पर कीट, बीमारी एवं खरपतवारों का अत्यधिक प्रकोप होता है, यदि अभी इनका नियंत्रण नही किया गया तो पूरा बगीचा बर्बाद हो सकता है। उन्होंने बताया कि अमरूद व आम में श्यामवर्ण रोग की रोकथाम हेतु बाविस्टीन 1 ग्राम प्रति लीटर अथवा कॉपर आक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अमरूद व अनार में फलमक्खी के प्रकोप को रोकने के लिए मेलाथियोन 50 ईसी प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पुराने फल वृक्षों में गोदान्ति रोग की समस्या होती है, इसके नियंत्रण के लिए कॉपर आक्सीक्लोराइड 0.3 प्रतिशत, बुझा चुना 0.1 प्रतिशत व बोरेक्स 0.3 प्रतिशत घोल का छिडकाव करना चाहिए इससें फलों का फटना भी कम होता है। उन्होंने बताया कि आंवला के रस्ट की रोकथाम हेतु घुलनशील गंधक 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करें। उन्होंने बताया कि नीबू के कैंकर के नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 250 मिग्रा व बाविस्टीन 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करना चाहिए। पौधों में निमेटोड के नियंत्रण के लिए पेसीलोमाइसिस, ट्राइकोडरमा व नीम की खली का उपयोग कारगर है। नये लगाये बगीचों मे थाला बनायें व खरपतवार पर नियंत्रण अवश्य करे।