लोक संगीत संध्या में घूमर नृत्य देख मंत्रमुग्ध हुए लोग; श्री सार्वजनिक पुस्तकालय के सौजन्य से हुआ भव्य सांस्कृतिक आयोजन
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) कस्बे में बीती रात्रि को श्री सार्वजनिक पुस्तकालय के सौजन्य से राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम में घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिली। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा (पोशाक) में सजी महिलाओं के हाथों का लचकदार संचालन और 80 कली के घाघरे को घुमाते हुए वृत्ताकार नृत्य को देखकर वहां उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
श्री सार्वजनिक पुस्तकालय अध्यक्ष रवि शर्मा ने बताया कि यह राजस्थान का राज्य नृत्य है, जिसकी शुरुआत मूल रूप से भील जनजाति द्वारा देवी सरस्वती की आराधना के लिए की गई थी। इसमें लय, ताल और ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकारों ने गोल घूमते हुए नृत्य किया है।
आज सांस्कृतिक आयोजनों में घूमर नृत्य आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है, जिसे देखकर स्थानीय लोग झूम उठे। घूमर नृत्य के अलावा भवाई कालबेलिया चरी नृत्य सहित भपग वादन का कार्यक्रम की भी प्रस्तुतियां दी गई।
कार्यक्रम के आयोजन के बीच ही श्री सार्वजनिक पुस्तकालय द्वारा इस वर्ष संस्था में पढकर राजकीय सेवा में चयनित हुए विद्यार्थियों का हरिश्चंद्र गुप्ता चिरंजीलाल बसवाल रामेश्वर शर्मा पीटीआई मुकेश जैन अध्यक्ष बार एसोसिएशन एवं ओमप्रकाश स्वामी द्वारा बच्चों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालक सुभाष तिवाड़ी द्वारा किया गया


