गोविंदगढ़ के ऐतिहासिक किले में लग रहा कचरे का ढेर: रोजाना उठते धुएं से कॉलेज के छात्रों और श्रद्धालुओं का सांस लेना दूभर
गोविंदगढ़ (अलवर)
कस्बे स्थित ऐतिहासिक प्राचीन किले में नगर पालिका क्षेत्र का कचरा लगातार डंप किए जाने से स्थानीय वातावरण पूरी तरह दूषित हो चुका है। स्थिति तब और भी भयावह हो गई, जब वहां एकत्र कचरे के ढेरों में प्रतिदिन आग लगाई जाने लगी। उठते जहरीले धुएं के कारण पास ही स्थित राजकीय महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और आसपास के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का सांस लेना दूभर हो गया है।
त्योहारों से पहले आस्था और सेहत पर संकट
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन एक निश्चित स्थान तय कर कचरा निस्तारण (डंपिंग यार्ड) की व्यवस्था करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। आगामी दीपावली पर्व को लेकर गोविंद देव जी और सीताराम जी मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजनों की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन रास्ते और मंदिर परिसर के पास फैली गंदगी व दुर्गंध के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले में स्थानीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों के बयान:
"कचरा डालने और जलाए जाने को लेकर कई बार उपखंड अधिकारी और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) को लिखित शिकायतें दी गई हैं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पालिका अपना डंप यार्ड नहीं बना पा रही है, जिससे ऐतिहासिक धरोहर का वातावरण इतना खराब हो गया है कि श्रद्धालुओं ने मंदिरों में आना तक कम कर दिया है।"
— सचिन शर्मा, स्थानीय निवासी
"नगर पालिका द्वारा ऐतिहासिक किले और मंदिरों के समीप कचरा पटका जा रहा है, जिससे पवित्र स्थलों की छवि धूमिल हो रही है और जन-आस्था पर चोट पहुंच रही है। दीपावली के अवसर पर गोविंद देव जी व सीताराम जी मंदिरों में बड़े आयोजन होने हैं, लेकिन पालिका प्रशासन इस गंदगी को हटाने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा।"
— सुनील मिश्रा, शहर अध्यक्ष, कांग्रेस
"किला और मंदिर की भूमि की रक्षा के लिए संघर्ष समिति ने पूर्व में लंबी लड़ाई लड़ी थी, लेकिन अब दबाव और प्रशासनिक अनदेखी के चलते ऐतिहासिक स्थल पर कचरा फेंका जा रहा है। निश्चित स्थान पर डंपिंग यार्ड का न बनना पालिका की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।"
— जोनू खेड़ापति, स्थानीय नागरिक

