पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में पुलिस का बड़ा एक्शन: 4 आरोपी गिरफ्तार, गांव में 6 थानों के 100 पुलिसकर्मी तैनात
वैर (भरतपुर) कोशलेन्द्र दत्तात्रेय।
बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना (68) की पीट-पीटकर की गई निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले में भरतपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से क्षेत्र में उपजे तनाव को देखते हुए 6 थानों के करीब 100 पुलिसकर्मियों को भौड़ागांव में तैनात किया गया है। भय और पुलिस कार्रवाई के डर से गांव के अधिकांश पुरुष फरार हैं और केवल महिलाएं व बच्चे ही गांव में बचे हैं।
4 आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी
वृत्ताधिकारी (डीएसपी) वृत्त भुसावर नीरज भारद्वाज ने बताया कि पूर्व विधायक की हत्या के मामले में पुलिस ने सघन तलाशी अभियान चलाकर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में वैर थाना क्षेत्र के भौड़ागांव निवासी भागमल गुर्जर, सोनी गुर्जर और शेर सिंह गुर्जर तथा नावर गांव निवासी कुमर सिंह गुर्जर शामिल हैं। पुलिस हिरासत में लिए गए इन आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है।
क्रैशर प्लांट पर 70-80 लोगों ने बोला था धावा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार शाम को पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना अपने क्रैशर प्लांट स्थित कार्यालय पर मौजूद थे। इस दौरान अचानक करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ ने लाठी-डंडों से लैस होकर हमला कर दिया। हमले में पूर्व विधायक और उनके सहयोगी गगन शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना के अनुसार घटना के वक्त वहां करीब 20-25 कर्मचारी मौजूद थे।
अतर सिंह भड़ाना को गंभीर स्थिति में रविवार देर रात 11:30 बजे जयपुर के एसएमएस (SMS) अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गांव में भारी पुलिस बल तैनात
हत्याकांड के बाद गांव में व्याप्त तनाव को नियंत्रित करने के लिए वैर, भुसावर, हलैना, खेड़ली मोड़, बयाना और नदबई थाने के लगभग 100 पुलिस जवानों को तैनात किया गया है।
अतर सिंह भड़ाना का राजनीतिक सफर
हरियाणा के फरीदाबाद के मूल निवासी अतर सिंह भड़ाना का राजस्थान की राजनीति में लंबा सफर रहा:
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1998: पहली बार बीजेपी के टिकट पर बयाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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2003: बीजेपी के टिकट पर ही बयाना से पहली बार विधायक चुने गए। विधायक बनने के बाद बयाना के शेरगढ़ गांव में फार्म हाउस बनाकर यहीं रहने लगे।
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2008: वसुंधरा राजे सरकार के पहले कार्यकाल में गुर्जर आंदोलन के दौरान सरकार के खिलाफ रुख अपनाया और बाद में कांग्रेस के टिकट पर नगर सीट से चुनाव लड़ा।
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वापसी: कुछ समय बाद वह पुनः भारतीय जनता पार्टी में लौट आए और बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई।

