श्री राजर्षि अभय समाज की 111वीं रामलीला: जनकपुरी अवलोकन से लेकर राम विवाह के प्रसंगों ने मोहा मन
अलवर / अनिल कुमार गुप्ता
अलवर मे श्री राजर्षि अभय समाज की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित 111वें वर्ष की ऐतिहासिक रामलीला के पांचवें दिन भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण एवं मनोहारी मंचन किया गया। जनकपुरी अवलोकन, पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और भव्य राम विवाह की लीलाओं ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तिरस से पूरी तरह सराबोर कर दिया।
पुष्प वाटिका और धनुष यज्ञ का रोमांचक प्रसंग
लीला की शुरुआत भगवान राम द्वारा जनकपुरी के अवलोकन से हुई, जहां लक्ष्मण जी की इच्छा पर मुनि विश्वामित्र ने उन्हें नगर देखने की आज्ञा दी। इसके पश्चात, पुष्प वाटिका में राम-लक्ष्मण द्वारा पूजन हेतु पुष्प लेने और माता सीता के गौरी पूजन के लिए आगमन का मनोहारी दृश्य दिखाया गया।
इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के सानिध्य में राम-लक्ष्मण सीता स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। जहाँ उपस्थित तमाम राजाओं के शिवधनुष उठाने में असफल होने पर राजा जनक ने निराशा व्यक्त की। तब गुरु की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम ने पलभर में शिवधनुष का भंजन कर दिया, जिससे संपूर्ण पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
लक्ष्मण-परशुराम संवाद और भव्य राम विवाह
धनुष टूटने पर महर्षि परशुराम का क्रोधित होकर आगमन हुआ। इस दौरान परशुराम और लक्ष्मण के बीच रोचक एवं तीखा संवाद हुआ, जिसने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इसके पश्चात, राजा जनक के आमंत्रण पर राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुरी पहुंचे। राम और सीता की युगल छवि के दर्शन कर सभी ने "सियावर रामचंद्र की जय" के उद्घोष किए, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
राजर्षि अभय समाज के प्रचार मंत्री देवराज शर्मा ने बताया कि समाज की ओर से आयोजित इस 111वें वर्ष की रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का विशेष प्रयास किया जा रहा है।

