खैरथल-तिजारा में गत वर्ष की अपेक्षा इस साल प्याज की रोपाई अधिक, किसान अलग-अलग तरीकों से कर रहे रोपाई

Aug 26, 2025 - 12:15
Aug 26, 2025 - 12:16
 0
खैरथल-तिजारा में गत वर्ष की अपेक्षा इस साल प्याज की रोपाई अधिक, किसान अलग-अलग तरीकों से कर रहे रोपाई


खैरथल (हीरालाल भूरानी) 

         खैरथल-तिजारा सहित अलवर जिले की लाल प्याज पूरे देश में मशहूर है। यह कच्चा सोना के नाम से मशहूर फसल किसानों को कभी निहाल कर देती है तो कभी सड़क पर ला देती है। गत वर्षों में प्याज़ की फसल ने किसानों की किस्मत ही बदल दी है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक गत वर्ष की अपेक्षा इस बार अधिक बुवाई की जा रही है। किसान लगातार बदलते हालात और पानी की कमी को देखते हुए अब नए-नए तरीकों से प्याज की खेती कर रहे हैं। जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण किसानों ने नए तरीका अपना रही है। अब बूंद-बूंद पानी से प्याज की सिंचाई कर बेहतर मुनाफा कमा रहे है।
तीन तरीकों से करते हैं प्याज की बुवाई :-

  • पहला तरीका खेत में मैड (ऊंची पट्टी) बनाकर दोनों तरफ प्याज का बीज लगाया जाता है। इसमें सिंचाई के लिए धोरे बनाए जाते हैं, जिनसे पानी बहाकर खेत को सींचा जाता है।       
  • दूसरा तरीका किसान बैड विधि से प्याज की बुवाई करते हैं। इस विधि में पानी की कमी को देखते हुए फव्वारे से खेत की सिंचाई की जाती है। 
  • तीसरा तरीका जिसमें ड्रिप बैड विधि से किसान प्याज की खेती कर रहे हैं। इसमें किसान खेत में सीधी मैड बनाते हैं और उन पर बूंद-बूंद सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम लगाते हैं। इस विधि से खेत में लगातार नमी बनी रहती है और प्याज की उपज भी बेहतर होती है। किसान अशोक कुमार ने बताया कि मैड विधि में तीन लाइन की मैड तैयार की जाती है, जिसमें प्याज का बीज बोया जाता है। इस तकनीक से किसानों का खर्च कम आता है और फसल तैयार होने पर अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।
           वहीं, कुलताजपुर निवासी किसान दयानंद यादव ने बताया कि ड्रिप मैड विधि से खेती करते हुए करीब 5 साल हो गए हैं। इसमें किसानों ने एक मैड में चार लेयर प्याज का कण यानि बीज लगाकर उसमें ड्रिप सिस्टम के तहत नलकियां लगाकर बूंद बूंद पानी के जरिए प्याज की खेती को पानी दिया जा रहा है। इससे पानी की बचत के साथ-साथ अच्छा प्याज का प्रोडक्शन तैयार हो रहा है। एक बीघा खेत में सभी खर्चों को लगाकर करीब एक लाख का हो जाता है।  सवा सौ से डेढ़ सौ मण एक बीघा खेत से प्याज तैयार हो जाती है।
           कृषि व उद्यान विभाग के जिला अधिकारी गोपाल लाल मीणा ने बताया कि गत वर्ष क्षेत्र में करीब बारह हजार वर्ग हेक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई थी, जिसका आंकड़ा इस वर्ष बढ़ने की संभावना है।

एक बीघा में तैयार हो जाती है ढाई सौ मण से ज्यादा प्याज
     खैरथल निवासी किसान नरेंद्र कुमार सैनी ने बताया कि बैड विधि में एक मैड में तीन लेयर में बीज लगाया है। इस विधि से खेत में कम बीज लगने के साथ किसान को प्याज एक बीघा में ढाई सौ मण से ज्यादा तैयार हो जाती है। जिले में किसान प्याज की बुवाई कर रहे, इससे किसान सबसे ज्यादा पंचगंगा सरदार कण का इस्तेमाल कर रहे हैं।

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी [email protected] या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................