हॉस्टल में सिखा रहे थे-भगवान को मानोगे तो नर्क जाओगे: मूर्ति को पानी में डालकर कहते ये डूबती है, क्रॉस नहीं

पुलिस को देख दीवार कूदने लगे बच्चे

Sep 4, 2025 - 14:26
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हॉस्टल में सिखा रहे थे-भगवान को मानोगे तो नर्क जाओगे: मूर्ति को पानी में डालकर कहते ये डूबती है, क्रॉस नहीं

अलवर में धर्म परिवर्तन के आरोप में पुलिस ने एक हॉस्टल में छापेमारी की है। पुलिस को देखकर बच्चे हॉस्टल की दीवार कूदकर भागने लगे।

पुलिसवाले दीवार पर चढ़े बच्चों को काफी देर तक समझाते रहे कि वो यहां उनके लिए आए हैं, डरो मत, नीचे आ जाओ। यहां रह रहे बच्चों ने बताया कि उन्हें सिखाया जाता था कि- भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे।

मूर्ति और क्रॉस को पानी में डुबोकर अंतर बताया जाता था। एक संगठन की शिकायत पर बुधवार शाम को एमआईए थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल में कार्रवाई की गई थी।

कई बच्चे काफी देर तक हॉस्टल की बाहर की दीवार पर ही घूमते रहे, वे नीचे आने से डरते रहे।
कई बच्चे काफी देर तक हॉस्टल की बाहर की दीवार पर ही घूमते रहे, वे नीचे आने से डरते रहे।

शिक्षा के नाम पर धर्म-परिवर्तन का आरोप आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को हॉस्टल में रखा जाता है। यहां शिक्षा के नाम पर उन्हें पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।

बुधवार शाम को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की शिकायत पर पुलिस ने छापेमारी की। मौके पर पुलिस पहुंची तो हॉस्टल के अंदर भगदड़ मच गई। मौके पर मौजूद 50 से ज्यादा बच्चे बिल्डिंग की 10 फीट से ज्यादा ऊंची दीवार फांदने लगे।

डरो मत..आपके लिए आए हैं हॉस्टल की बाउंड्री और दीवार पर चढ़े बच्चे को नीचे उतारने के लिए पुलिसवालों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्हें नीचे उतारने के लिए पुलिसकर्मी काफी देर तक समझाइश करते रहे। पुलिसकर्मियों ने कहा- डरो मत, हम तुम्हारे लिए आए हैं। इस दौरान कुछ बच्चे रोने लगे और डर के कारण चीखने भी लगे।

एक मासूम हॉस्टल की दीवार पर लगे पाइप को काफी देर तक पकड़ कर खड़ा रहा। वहीं एक बच्चा करीब 10 फीट की दीवार पर लटककर खड़ा रहा।
एक मासूम हॉस्टल की दीवार पर लगे पाइप को काफी देर तक पकड़ कर खड़ा रहा। वहीं एक बच्चा करीब 10 फीट की दीवार पर लटककर खड़ा रहा।

बच्चों का आरोप- डराया जाता था हॉस्टल में रहने वाले बच्चों ने बताया कि उन्हें धर्म और भगवान को नहीं मानने के लिए उकसाया जाता था। उन्हें मौत का भी डर दिखाया जाता था।

  • 2 मासूमों ने हॉस्टल पर क्या आरोप लगाए...

आग में जलने के नाम से डराया: हॉस्टल में फादर कहते हैं कि अगर तुम भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे। आग में जला दिए जाओगे। तुम्हें केवल बाइबल को ही पढ़ना है। हिंदुओं के नकली भगवान हैं। ईसा मसीह की प्रार्थना से हमें स्वर्ग मिलता है और हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेने से नर्क मिलता है।

असली भगवान तो ईसा मसीह है:

 फादर कहते हैं ईसा मसीह की प्रार्थना से हमें स्वर्ग मिलता है और हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेने से नर्क मिलता है। फादर बाल्टी में पानी भरकर देवी-देवताओं की मूर्तियों को पानी में डालते हैं। पानी में मूर्ति डूब जाती है तो कहते हैं कि तुम्हारा भगवान स्वयं डूब गया है, वो तुम्हें कैसे बचाएगा।

अहमदाबाद का रहने वाला है आरोपी फादर

 पुलिस के अनुसार मौके से अहमदाबाद के रहने वाले अमृत और रामगढ़ (अलवर) के रहने वाले सोनू रायसिख को पकड़ा है। मौके से एक धर्म से जुड़े धार्मिक ग्रंथ और किताबें जब्त की हैं। जानकारी के अनुसार अगस्त महीने में सीकर में ईसाई धर्म गुरु सेल्वाराज उर्फ सेल्बुराज ने कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था। जिसमें अमृत का भी नाम है। जो फिलहाल जमानत पर है।

एसपी बोले- सस्ती शिक्षा के नाम पर बुलाते हैं

 SP सुधीर चौधरी ने बताया कि जिले में कुछ लोगों के अवैध गतिविधियों में लिप्त होने की सूचना मिली। जो गरीबों को सस्ती शिक्षा के नाम पर बुलाते हैं। धर्म को लेकर गलत शिक्षा देकर धर्म परिवर्तन की बात सामने आई है। इस मामले में दो जनों को अरेस्ट किया है, जिनमें अमृत गुजरात का रहने वाला है। जिसके खिलाफ पहले से सीकर में मुकदमा दर्ज है। अब इसकी जमानत कैंसिल कराने का प्रयास करेंगे।

जिले में दूसरी जगहों से भी धर्म परिवर्तन कराने की बातें सामने आई हैं। ये गरीब तबके के बच्चों को छात्रावास में रखते थे। बच्चों को साधारण भाषा में ईसाई धर्म की अच्छाई बताकर हिंदू और सिख धर्म की कमी बताते हैं। हो सकता है कि ये बच्चों के माता-पिता को सहायता भी देते हों। ऐसे मामलों में राजस्थान में पहले भी मुकदमे दर्ज हुए हैं। उनकी भी जानकारी मांगी है। भविष्य में ऐसा नहीं हो इसके लिए आमजन को भी सहयोग करने की जरूरत है।

हॉस्टल में रहने वाले सभी बच्चे नाबालिग

ईसाई मिशनरी के हॉस्टल में अलवर सहित विभिन्न जगहों के करीब 52 बच्चे रहते हैं। जिनकी उम्र 6 से लेकर 17 साल के बीच है। बच्चों का कहना था कि यहां हम रहकर पढ़ते हैं।

हॉस्टल में अलवर जिले के अलावा हनुमानगढ़ व दिल्ली के बच्चे रहते हैं। जो अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं। बच्चों ने बताया कि हमें एक साल में 3 हजार रुपए देने होते हैं।

संस्था हमारा खाने-पीने व रहने का पूरा खर्चा उठाती है। महिला मारथा का कहना था कि यह हॉस्टल नया जीवन संस्था तमिलनाडु से संचालित है। संस्था के बड़े सर ने मेरे पति अमृत का पिछले 2 महीने पहले ही यहां पर ट्रांसफर किया था।

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