राजकीय सेटेलाइट हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव बना; सेटेलाइट अस्पताल में सोनोग्राफी जांच नहीं, निजी लैब पर भेज रहे
खैरथल (हीरालाल भूरानी) जिला मुख्यालय पर स्थित एकमात्र राजकीय सेटेलाइट हॉस्पिटल में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का काफी अभाव बना हुआ है। जिसके कारण शहरवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण लाभनहीं मिल पा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में आज तक अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) जैसी जरूरी जांच सुविधा खैरथल के जिला बनने के बावजूद भी शुरू नहीं हो सकी। इसका खामियाजा आम मरीजों को आर्थिक और शारीरिक दोनों रूप से भुगतना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जांच सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी सोनोग्राफी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें 800 से 1200 तक खर्च करने पड़ते हैं।
कागजों में अपग्रेड, जमीन पर फेल अस्पताल
वर्ष 2022 में खैरथल के इस राजकीय अस्पताल को सेटेलाइट हॉस्पिटल का दर्जा दिया गया था। उम्मीद थी कि इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। न तो नए संसाधन उपलब्ध कराए गए और न ही विशेषज्ञ स्टाफ की नियुक्ति की गई। सैटेलाइट अस्पताल में चिकित्सकों के आधे पद रिक्त हैं, सेटेलाइट अस्पताल का भवन जर्जर हालात में है। कई सामाजिक संगठनों व राजनैतिक दलों के लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजे।
लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न चिकित्सक लगे न सोनोग्राफी मशीन की सुविधा ही उपलब्ध हो सकी जिससे शहर वासियों को निजी अस्पतालों में जांच करानी पड़ रही है। शहर वासी सुरेश चंद शर्मा, नारायण छंगानी, कप्तान सिंह और विरमा देवी सहित कई मरीजों ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन सुविधा न होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया गया। मजबूरी में निजी सेंटरों पर महंगे दामों में जांच करानी पड़ रही है।
इस संबंध में सेटेलाइट हास्पिटल खैरथल के पीएमओ डॉ नितिन शर्मा ने बताया कि अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन और सोनोलॉजिस्ट दोनों ही नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।