वर्षों तक आमजन झेलते रहे परेशानी:10 के सिक्कों पर टूटा भ्रम, अब मजबूरी में बदल रही बाजार की सोच
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
वर्षों तक बिना किसी सरकारी आदेश के 10 रुपए के सिक्के लेने से इनकार करने वाले दुकानदार अब इन्हें फिर से स्वीकार करने लगे हैं। छोटे नोटों की लगातार कमी और कई व्यापारियों यूपीआइ भुगतान से बचने की प्रवृत्ति के चलते बाजार का रवैया बदल रहा है। इससे सबसे बड़ी राहत आम लोगों को मिली है, जिन्हें लंबे समय तक केवल 10 रुपए के सिक्के होने पर खरीदारी करने में परेशानी, बहस और कई बार अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ता था। खैरथल के बाजार में लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि 10 रुपए के सिक्के मान्य नहीं है। जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने कभी भी इन सिक्कों को अमान्य घोषित नहीं किया। इसके बावजूद अधिकांश दुकानदार इन्हें लेने से बचते रहे, जिससे ग्राहकों को छोटी-छोटी खरीदारी के लिए भी अतिरिक्त पैसे जुटाने पड़ते थे। कई बार लोग सिक्के बदलवाने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी के दौरान केवल 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को ही अमान्य किया गया था। 10 रुपए के सिक्कों पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई थी। इसके बावजूद खैरथल सहित कई छोटे शहरों में अफवाहों और भ्रम के कारण इन सिक्कों का प्रचलन लगभग समाप्त हो गया। वहीं अलवर, जयपुर, रेवाड़ी, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में ये सिक्के सामान्य रूप से स्वीकार किए जाते रहे।
अब बाजार की परिस्थितियां बदलने लगी है। 10 रुपए के नोटों की उपलब्धता कम होने और कुछ व्यापारियों द्वारा डिजिटल भुगतान से बचने के कारण दुकानदारों ने फिर से 10 रुपए के सिक्के लेना शुरू कर दिया है। इससे ग्राहकों को खुले पैसे की समस्या से काफी राहत मिल रही है और छोटे लेन-देन पहले की तुलना में अधिक सहज हो गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता हीरालाल भूरानी एवं प्रमोद केवलानी ने बताया कि वर्षों तक बिना किसी वैधानिक आदेश के दुकानदारों ने 10 रुपए के सिक्के लेने से इनकार किया, जबकि ये पूरी तरह वैध मुद्रा है। अब आवश्यकता के चलते व्यापारियों ने अपनी सोच बदली है और बाजार में इन सिक्कों का चलन फिर बढ़ने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यदि उनके पास 10 रुपए के सिक्के होते थे तो कई दुकानदार सामान देने से मना कर देते थे। इससे अनावश्यक विवाद और परेशानी पैदा होती थी। अब अधिकांश दुकानदार बिना किसी हिचकिचाहट के सिक्के स्वीकार कर रहे हैं, जिससे बाजार में लेन-देन आसान हुआ है।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार वर्ष 2005 से अब तक जारी 10 रुपए के सभी 14 प्रकार के सिक्के पूरी तरह वैध मुद्रा है। किसी भी दुकानदार, बैंक या संस्थान द्वारा इन्हें लेने से इनकार करना नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में लोगों का मानना है कि भविष्य में इस तरह के भ्रम पूरी तरह समाप्त होने चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं को फिर कभी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

