धरसोनी में 125वां ऐतिहासिक कुश्ती दंगल संपन्न: सत्यवीर और दीपक बने संयुक्त विजेता, 'धरसोनी खिताब' पर जमाया कब्जा
हलैना (विष्णु मित्तल)। निकटवर्ती ग्राम पंचायत धरसोनी में ग्राम पंचायत एवं मेला कमेटी के तत्वाधान में 125वें विशाल कुश्ती दंगल का भव्य आयोजन किया गया। विधायक बहादुर सिंह कोली के मुख्य आतिथ्य एवं प्रशासक सरपंच रोहित सिंह चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस दंगल में देश के विभिन्न राज्यों से आए पहलवानों ने अपने दांव-पेचों से दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
'धरसोनी खिताब' के लिए कांटे की टक्कर दंगल का सबसे मुख्य मुकाबला 21 हजार रुपये की इनामी राशि और 'धरसोनी खिताब' के लिए सह निवासी सत्यवीर सिंह और नूरपुर निवासी दीपक सिंह के बीच हुआ। दोनों ही पहलवानों के बीच काफी देर तक कड़ा मुकाबला चला, लेकिन अंत तक कोई फैसला न होने पर मेला कमेटी ने दोनों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित कर खिताब से नवाजा।
वहीं 7,100 रुपये की इनामी राशि के दूसरे बड़े मुकाबले में परमदरा के बलराम अखाड़ा निवासी मंदीप सिंह ने लोहागढ़ स्टेडियम (भरतपुर) के शिवा पहलवान को पटखनी देकर जीत दर्ज की।
विभिन्न राज्यों से पहुंचे नामचीन पहलवान मेला कमेटी अध्यक्ष मोहन सिंह व प्रशासक रोहित सिंह ने बताया कि मेले के 125वें संस्करण में राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित भरतपुर, डीग, मथुरा, धौलपुर, करौली व अलवर के नामचीन पहलवानों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। विजेताओं को प्रशासक रोहित सिंह एवं अतिथियों द्वारा नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
अतिथियों ने कराई विशेष कुश्तियां कार्यक्रम में पंचायत समिति सदस्य धीर सिंह जटवलाई, भाजपा जिला प्रवक्ता शेर सिंह, ग्रामीण मण्डल महामंत्री हरप्रसाद सिंह, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राजाराम भूतोली, हतीजर सरपंच गिर्राज सिंह, रमासपुर सरपंच मुरारी चौधरी, तेज सिंह हिसामडा, जसवीर करनाल, सोनू मूडिया साद सहित कई गणमान्य लोग विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों ने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कई 'स्पेशल कुश्तियां' भी कराईं।
दंगल में पूर्व सरपंच पूरन सिंह मुख्य कोच की भूमिका में रहे, जबकि आखिरी कुश्ती जसवीर सिंह (करनाल) और सोनू सिंह (मूडिया साद) ने संपन्न कराई। आयोजन को सफल बनाने में मेला कमेटी सदस्य शैलेश चौधरी, राजेश तिवारी, श्याम शर्मा, बबलू धरसोनी, शेर सिंह डागुर और शैलेंद्र सिंह सहित समस्त ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा।

