श्रद्धा और परंपरा का संगम: खैरथल में सिंधी समाज ने हर्षोल्लास से मनाया पारंपरिक 'गोगड़ा' पर्व
नागपंचमी पर सिंधी समाज ने श्रद्धा के साथ मनाया 'गोगड़ा' पर्व, शक्कर के नाग पूजकर मांगी परिवार की सुरक्षा
खैरथल (हीरालाल भूरानी)। सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर खैरथल के सिंधी समाज द्वारा पारंपरिक 'गोगड़ा पर्व' पूरी श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष दिन पर सिंधी समाज के परिवारों में नाग देवता की पूजा-अर्चना कर घर की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सुरक्षा की मंगल कामना की गई।
पूर्व पार्षद एवं समाजसेविका गोदावरी भारती ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सिंधी संस्कृति में गोगड़ा पर्व का अपना एक विशेष और पारंपरिक स्थान है। मान्यता के अनुसार, नाग देवता की विधिवत पूजा करने से परिवार के सभी सदस्यों पर आने वाले संकट दूर होते हैं और नाग देव उनकी रक्षा करते हैं।
???? पीपल के नीचे पूजा और शक्कर के आठ नागों की परंपरा
आनंद नगर में समाज की महिलाओं ने मंदिर के समीप स्थित पीपल के वृक्ष के नीचे एकत्रित होकर गोगड़ा देव की शास्त्रीय विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
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अनोखी परंपरा: इस अवसर पर शक्कर से विशेष रूप से आठ छोटे-छोटे नाग बनाए गए। महिलाओं ने इन नागों का पूजन कर उन्हें घर के मुख्य द्वार और अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया।
????️ एक दिन पहले बना व्यंजन, परिजनों ने ग्रहण किया 'ठंडा भोजन'
पर्व की परंपरा के अनुसार, गोगड़ा देव से एक दिन पूर्व ही घरों में तैयारी शुरू हो गई थी।
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महिलाओं ने एक दिन पहले ही मीठी रोटियाँ, मीठे पकौड़े, विशेष सब्जियाँ तथा अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाकर तैयार रख लिए थे।
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पर्व के दिन महिलाओं ने नाग देवता को जल और दूध के 'ठंडे छींटे' लगाकर परिवार की दीर्घायु और खुशहाली का आशीर्वाद माँगा।
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इसके पश्चात पूरे परिवार ने मिलकर श्रद्धापूर्वक बासी (ठंडा) भोजन ग्रहण किया और सदियों पुरानी इस सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखा।

