श्रद्धा और आस्था के साथ की गई पूजा भी भक्त के लिए विशेष - लोकेश
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) सावन का आखिरी सोमवार, 24 अगस्त को है। सावन मास को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। वैसे तो सावन का हर दिन शिव आराधना के लिए विशेष होता है।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि सावन अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले इस महीने का समापन 28 अगस्त को है। सावन के अंतिम सोमवार 24 अगस्त की विदाई के साथ शिवभक्तों को भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करने का अवसर मिलेगा। इस बार सावन में चार सोमवार होने के कारण पूरे महीने शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही है। अब अंतिम सोमवार को भी भगवान शिव की पूजा को लेकर भक्तों में खासा उत्साह है।
जिन लोगों से पूरे सावन किसी कारणवश नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा नहीं हो सकी, उनके लिए अंतिम सोमवार को श्रद्धा के साथ शिव आराधना करने का विशेष अवसर माना जा रहा है।
यदि किसी श्रद्धालु के पास समय कम है तो अंतिम सोमवार को भगवान शिव का जल और गाय के कच्चे दूध से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें ।और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा-प्रार्थना करें। श्रद्धा और आस्था के साथ की गई यह सरल पूजा भी भक्त के लिए विशेष हो सकती है।

