डीग: कुम्हेर बाल विकास परियोजना में प्रशासनिक फेरबदल से लड़खड़ाई व्यवस्थाएं, पोषण योजनाओं पर मंडराया संकट
डीग (विष्णु मित्तल)
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं सीधे तौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी होती हैं। ऐसे में डीग जिले के कुम्हेर बाल विकास परियोजना की प्रशासनिक व्यवस्था में अचानक किए गए बड़े फेरबदल को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस प्रशासनिक बदलाव और मानव संसाधन के पुनर्समायोजन के कारण जिले में पोषण योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं, जिसका सीधा असर गर्भवती व धात्री माताओं, शिशुओं और प्री-स्कूल के बालक-बालिकाओं पर दिखाई देने लगा है।
मानव संसाधन और अतिरिक्त प्रभार पर उठ रहे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुम्हेर परियोजना लंबे समय से अनुभवी एवं प्रशिक्षित गैर-सरकारी संगठनों के स्टाफ के सहयोग से सफलतापूर्वक संचालित हो रही थी। इसके बावजूद, परियोजना का प्रशासनिक चार्ज बदलकर नगर सीडीपीओ को सौंप दिया गया तथा डीग परियोजना के स्टाफ को भी बड़ी संख्या में कुम्हेर में तैनात कर दिया गया।
समीक्षकों का कहना है कि जब स्वयं डीग जिले में महिला पर्यवेक्षकों और कार्यालय स्टाफ की भारी कमी है, तो उपलब्ध सीमित मानव संसाधन को अन्य परियोजना में स्थानांतरित करने का प्रशासनिक औचित्य क्या है? जिले की चार परियोजनाओं में से केवल दो पर ही विभागीय सीडीपीओ उपलब्ध होने और अधिकारियों के पास अतिरिक्त प्रभार होने की स्थिति में यह प्रशासनिक निर्णय गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
मानदेय भुगतान में देरी और पोषण ट्रैकर की सुस्ती
इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच सबसे चिंताजनक स्थिति कुम्हेर परियोजना की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय भुगतान में देरी को लेकर सामने आ रही है। जमीनी स्तर पर विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली इन कार्यकर्ताओं का समय पर मानदेय भुगतान होना प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
इसके अलावा, भरतपुर परियोजना क्षेत्र में पहले ही पोषण कीटों की कमी का मामला उजागर हो चुका है। ऐसे समय में विभाग की मुख्य प्राथमिकता पोषण सामग्री की समय पर उपलब्धता, वितरण, लाभार्थियों की नियमित मॉनिटरिंग, पोषण ट्रैकर में शत-प्रतिशत अपडेट और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम होनी चाहिए। जानकारों का मानना है कि पोषण किट की उपलब्धता में अंतर और प्रशासनिक फेरबदल सीधे तौर पर नवजात स्वास्थ्य और कुपोषण से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
योजनाओं की समीक्षा और सुधार की मांग
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस फेरबदल के कारण जमीनी योजनाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का तुरंत आकलन करे। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान की समीक्षा करने तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उड़ान योजना और पोषाहार वितरण जैसी महत्वपूर्ण विभागीय योजनाओं की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए ताकि डीग जिले के नौनिहालों और महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।

