EWS पात्रता नियमों के सरलीकरण एवं आवश्यक संशोधन के लिए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने उठाई आवाज
जयपुर (गिर्राज सौलंकी)
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के पात्र परिवारों, विद्यार्थियों और युवाओं के हितों को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, राजस्थान प्रदेश की ओर से जयपुर में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान महासभा ने EWS व्यवस्था को अधिक सरल, व्यावहारिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष कई अहम सुझाव रखे।
क्षेत्रीय विषमताओं और कृषि भूमि की सीमा पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के युवा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने EWS पात्रता में पांच एकड़ कृषि भूमि की सीमा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य राज्यों से भिन्न हैं। बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, बीकानेर, चूरू और नागौर जैसे पश्चिमी राजस्थान के असिंचित क्षेत्रों में कृषि पूरी तरह वर्षा आधारित है, जहां भूमि की उत्पादकता और आर्थिक मूल्य अलग होते हैं।
उन्होंने मांग की कि भूमि के क्षेत्रफल के बजाय उसकी उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता और परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर पात्रता का निर्धारण होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोग गठन और रिक्त पद भरने की मांग
महासभा ने मांग की कि राजस्थान की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रभावी आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जो देशभर में EWS पात्रता मानदंडों और व्यावहारिक समस्याओं का व्यापक अध्ययन करे। इसके साथ ही, राजस्थान में पहले से गठित आयोग के रिक्त अध्यक्ष पद को तत्काल प्रभाव से भरने की मांग भी उठाई गई, ताकि सामान्य वर्ग से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान हो सके।
प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मेश कुमार सिंह ने कहा कि महासभा का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों में समरसता और जरूरतमंदों को संबल प्रदान करना है। उन्होंने सामान्य वर्ग के हितों के लिए कार्य कर रहे सभी सामाजिक संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर प्रभावी आवाज उठाने का आह्वान किया।

