अलवर में युवा कवि प्रेम शर्मा के काव्य संग्रह 'प्रेम गली अति साँकरी' पर हुआ सार्थक विमर्श; वक्ताओं ने कहा- कविताएं समाज को देती हैं प्रेम का आधार
अलवर / कमलेश जैन
स्थानीय विजय नगर स्थित जागृति मूक बधिर संस्थान के पास एक गरिमामयी पुस्तक-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान युवा कवि प्रेम शर्मा के हाल ही में प्रकाशित चर्चित काव्य संग्रह 'प्रेम गली अति साँकरी' पर गहन और सार्थक चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रघुवर दयाल जैन ने की।
प्रेम की फसल उगाने का प्रयास करती हैं कविताएं
समारोह के मुख्य अतिथि स्वामी निर्वाण बोधिसत्व ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेम की कविताएं रूढ़ समाज को प्रेम का आधार सौंपती हैं। 'प्रेम' अपनी रचनात्मकता में नई स्थापनाओं के लिए कुछ पुराना तोड़ते भी नजर आते हैं, और वे ऐसे रचनाकार हैं जो कविता को असल मायनों में जीते हैं।
चर्चा के दौरान लोकेश तिवारी ने तुलसी और कबीर जैसे पूर्ववर्ती कवियों की रचनात्मकता के परिप्रेक्ष्य में प्रेम शर्मा की कविताओं की विस्तार से व्याख्या की। मनीष वर्मा ने इन कविताओं को अनुभूति से उपजी रचनाएं बताया। डॉ. वेद प्रकाश यादव 'सहज' ने कहा कि कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से दुनिया के बंजर खेत में प्रेम की फसल उगाने का प्रयास कर रहे हैं। दीपक शर्मा ने कवि के साहस को रेखांकित किया, जबकि रघुनंदन अवस्थी और रामचरण 'राग' ने कहा कि प्रेम शर्मा अलवर की धरती से हिंदी कविता को प्रेम की एक मौलिक और नई दृष्टि प्रदान कर रहे हैं।
प्रबुद्ध जनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के संयोजक रामचरण 'राग' ने बताया कि इस विमर्श को डॉ. शिवचरण चौड़वाल, डॉ. मुकेश यादव, देवांश जांगिड़, मोनिका धार, मुकेश गर्ग, डॉ. राहुल दीक्षित, रंगकर्मी गोविंद सिंह और यथार्थ शर्मा ने अपने वक्तव्यों से और अधिक समृद्ध बनाया।
इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य नागरिक और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे, जिनमें गिरिराज प्रसाद मिश्रा, अंकुर सैनी, कपिल शर्मा, युद्धवीर सिंह, गीतकार पुरुषोत्तम शर्मा, डॉ. बीना गुप्ता, मनीष गुप्ता, सुंदर, मो. अजीज और शर्मिला आदि प्रमुख रूप से शामिल थे। अंत में कवि प्रेम शर्मा ने सभी आगंतुकों और साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

