लक्ष्मणगढ़: खंडेलवाल धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा, श्राद्धकाल में पितृ दान और तर्पण का बताया विशेष महत्व
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
कस्बे की खंडेलवाल धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथावाचक ज्योति शिखा दीदी ने संगीतूमय व्याख्या के दौरान पितृपक्ष (श्राद्ध काल) में श्रीमद् भागवत कथा, पितृ दान, श्राद्ध और तर्पण के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस दौरान किए गए दान-पुण्य और कथा श्रवण से पितरों को मोक्ष और शांति की प्राप्ति होती है।
पितृ पक्ष में भागवत कथा और दान का महत्व
कथावाचक शिखा दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पितृपक्ष में भागवत कथा सुनने या कराने से जीवन के दुखों और कष्टों का नाश होता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। मनुष्य पर देव ऋण, ऋषि ऋण के साथ-साथ पितृ ऋण भी होता है, और भागवत कथा के श्रवण व संबंधित दान से इन ऋणों से मुक्ति मिलती है।
उन्होंने बताया कि पितृपक्ष में अन्न दान, गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन और पिंडदान करने से पूर्वज तृप्त होते हैं। प्रसन्न होकर वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, तो तीर्थों में पिंडदान के साथ-साथ भागवत कथा का श्रवण या पाठ कराना अत्यंत प्रभावशाली और मोक्षदायी माना गया है।
गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन के दौरान अनेक महिलाओं सहित खंडेलवाल समाज के अध्यक्ष मदनलाल गुप्ता, नवीन खारवाल, गोविंद खारवाल, खेमचंद बैरवा, प्रकाश प्रजापत, लोकेश कुमार, गंगा लहरी, और लल्लूराम सैनी सहित क्षेत्र के अनेक व्यापारी गण एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

