पितृ ऋण से मुक्ति का अवसर: 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर स्नान, दान और तर्पण का रहेगा विशेष महत्व
लक्ष्मणगढ़: 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी सर्वपितृ अमावस्या, पितृ पक्ष का होगा समापन, जानें श्राद्ध और तर्पण की विधि
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
वर्ष 2026 की सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा और पूर्वजों की विदाई पृथ्वी लोक से की जाएगी। शारदीय नवरात्रि के ठीक एक दिन पहले आने वाली इस तिथि का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व है।
तिथि और मुहूर्त की जानकारी
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर को रात्रि 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर को रात्रि 9:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 10 अक्टूबर को ही सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध किया जाएगा।
श्राद्ध कर्म के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष मुहूर्तों को अत्यंत शुभ माना गया है:
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कुतुप मुहूर्त: प्रातः 11:34 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक।
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रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:21 बजे से 1:07 बजे तक।
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अपराह्न काल: दोपहर 1:07 बजे से 3:28 बजे तक।
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व और विधि
मान्यता है कि जिन पूर्वजों की मृत्यु की सही तिथि ज्ञात नहीं होती है, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है। इसके अलावा, यदि किसी कारणवश परिवारजन अपनी निर्धारित तिथि पर श्राद्ध करना भूल गए हों, तो वे भी इस दिन श्राद्ध कर्म संपन्न कर सकते हैं।
इस दिन प्रातःकाल पवित्र स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए। नदी के किनारे या घर के आंगन में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल, जौ, चावल और दूध से तैयार पिंड अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद गाय, कौए, कुत्ते, चींटियों और देवताओं के लिए पंचबलि भोजन निकालकर ब्राह्मणों को भोजन व दक्षिणा दी जाती है। अंत में पूर्वजों से क्षमा प्रार्थना कर उनकी विदाई की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

