शीशम तिराहा सर्किल निर्माण पर उठे सवाल: भव्यता और ट्रैफिक का रखें ध्यान, समृद्ध भारत अभियान ने की एक्सपर्ट टेस्ट की मांग
शीशम तिराहे पर प्रस्तावित सर्किल का निर्माण तकनीकी परीक्षण के बाद ही हो: समृद्ध भारत अभियान
शहर की सांस्कृतिक पहचान, भव्यता और भविष्य के यातायात दबाव को ध्यान में रखने की मांग
भरतपुर | विष्णु मित्तल
भरतपुर के प्रमुख प्रवेश द्वार शीशम तिराहे पर प्रस्तावित सर्किल निर्माण को लेकर समृद्ध भारत अभियान ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है। संगठन के निदेशक सीताराम गुप्ता ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि सर्किल का निर्माण केवल यातायात नियंत्रण तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें शहर के गौरवमयी इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और पर्यटकों के अनुभव का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने विशेषज्ञों द्वारा स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं तकनीकी परीक्षण कराए जाने तक निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोकने का आग्रह किया है।
प्रवेश द्वार का आकर्षण और भव्यता न हो प्रभावित
सीताराम गुप्ता ने पत्र में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में जिस प्रकार सर्किल का निर्माण प्रस्तावित या शुरू किया जा रहा है, उससे भरतपुर के मुख्य प्रवेश द्वार की दृश्यता और सुंदरता दबने की आशंका है। किसी भी नए विकास कार्य का उद्देश्य शहर की सुंदरता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसकी पहले से स्थापित पहचान को कमजोर करना।
ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का सता रहा डर
शीशम तिराहा शहर के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक है, जहाँ से रोज़ाना हज़ारों वाहन गुजरते हैं। गुप्ता ने आगाह किया कि यदि सर्किल का आकार और डिज़ाइन ट्रैफिक इंजीनियरिंग के वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं हुआ, तो भविष्य में यहाँ स्थायी जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी बाधित हो सकती है।
संयुक्त समिति के निरीक्षण और जन-सुझाव की मांग
संस्था ने जिला प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे हैं:
- तकनीकी परीक्षण: पीडब्ल्यूडी, ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और स्वतंत्र ट्रैफिक विशेषज्ञों की एक संयुक्त समिति बनाकर स्थल का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
- जन-भागीदारी: स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेकर ही अंतिम डिज़ाइन को हरी झंडी दी जाए।
- संसाधनों की सुरक्षा: जल्दबाजी में गलत निर्माण से बाद में सार्वजनिक धन की बर्बादी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विकास कार्य को रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन से होने वाला निर्माण दूरदर्शी, सुरक्षित और भरतपुर की ऐतिहासिक गरिमा के अनुकूल हो।

