आरक्षण की लॉटरी से राजनीतिक गणित उथल-पुथल: लक्ष्मणगढ़ में सुरक्षित सीटों का बदला नक्शा, अब नए वार्डों में ज़मीन तलाश रहे दावेदार
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
लक्ष्मणगढ़। नगर पालिका चुनाव के लिए आरक्षण की लॉटरी निकलते ही कस्बे के राजनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है। कई सालों से अपने-अपने वार्डों में जमीन मजबूत करने में जुटे संभावित प्रत्याशियों के समीकरण लॉटरी के एक झटके से पूरी तरह बदल गए हैं। जिन नेताओं ने चाय की चुस्कियों, सामाजिक आयोजनों, सवामणि के कार्यक्रमों और सुख-दुख में मदद के जरिए अपने वार्डों में पकड़ बनाई थी, अब उन्हें नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी पड़ रही है।
अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला: चुनाव में बढ़ा रोमांच नगर पालिका अध्यक्ष का पद अनारक्षित (महिला) घोषित होने के बाद मुकाबले में दिलचस्प मोड़ आ गया है। जो दिग्गज नेता लंबे समय से अध्यक्ष पद की कुर्सी के सपने संजोए बैठे थे और अपनी बिसात बिछा रहे थे, उनके बीच अब नए समीकरणों को लेकर भारी गहमागहमी है। इस फैसले ने कई बड़े चेहरों के समीकरण साधने की चुनौती बढ़ा दी है।
25 वार्डों का आरक्षण तय, अब जीत के जोड़-तोड़ में जुटे नेता नगर पालिका के कुल 25 वार्डों में आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद राजनीतिक बिसात पूरी तरह पलट गई है। जिन्होंने अपने वार्डों को 'सुरक्षित सीट' मानकर तैयारियां पूरी कर रखी थीं, वे अब मनपसंद और सुरक्षित विकल्प की तलाश में जुट गए हैं। संभावित उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर अब किस वार्ड का रुख किया जाए, जहाँ जीत की राह आसान हो सके।
नए वार्डों में 'नब्ज' टटोलने की कवायद शुरू बदले हालात में नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए इलाकों में जाकर नए रिश्ते बनाने और मतदाताओं का भरोसा जीतने की है। आरक्षण की सूची आने के बाद अब दावेदार अपने समर्थकों के साथ नए वार्डों का दौरा कर रहे हैं। मतदाता की नब्ज टटोलने, सामाजिक समीकरणों का जोड़-तोड़ बिठाने और जीत का सही गणित लगाने का दौर शुरू हो चुका है। देखना दिलचस्प होगा कि आरक्षण के इस बदलाव के बीच कौन से नेता नए समीकरणों को साधकर बाजी मारते हैं।

