भरतपुर जिले की 41 अन्नपूर्णा रसोई आज से बंद: 8 महीने से अटका 3 करोड़ का अनुदान, भूखे लौट रहे जरूरतमंद
भरतपुर (राजस्थान) भरतपुर जिले में संचालित सभी 41 अन्नपूर्णा रसोइयों पर सोमवार से ताले लटक गए हैं। पिछले आठ महीनों से सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी (अनुदान राशि) का भुगतान न होने के कारण संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। करीब 3 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया होने की वजह से व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। नतीजतन, रोजाना नाममात्र की दर पर भरपेट भोजन की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मजदूर और जरूरतमंद लोगों को भूखे पेट ही मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
- उधार राशन के सहारे खींचे 8 महीने, अब नकद खर्चों ने रोकी राह
रसोई संचालकों ने बताया कि पिछले आठ माह से सरकारी अनुदान न मिलने के बावजूद वे राशन विक्रेताओं से उधार सामान लेकर जैसे-तैसे व्यवस्था संभाले हुए थे। हालांकि, अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। गैस सिलिंडर और हरी सब्जियां नकद में ही खरीदनी पड़ती हैं, साथ ही रसोइयों में काम करने वाले कर्मचारियों की मजदूरी भी महीनों से अटकी है। संचालकों का कहना है कि वे इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
- जिले में कुल 41 रसोइयां, शहर में 15 केंद्र संचालित
मानव संसाधन विकास एवं कल्याण संस्थान के प्रतिनिधि ने जानकारी दी कि उनकी संस्था पिछले छह वर्षों से रसोइयों का संचालन कर रही है। अकेले भरतपुर शहर में 15 और पूरे जिले में कुल 41 अन्नपूर्णा रसोइयां संचालित हैं, जिनमें से 4 केंद्र उनकी संस्था के जिम्मे हैं। अनुदान रुकने से सभी संस्थाएं गंभीर वित्तीय संकट से घिर गई हैं।
- अन्य जिलों में भुगतान जारी, भरतपुर की अनदेखी का आरोप
संचालकों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जोधपुर, जालोर, अजमेर, अलवर और पड़ोसी जिले धौलपुर में अन्नपूर्णा रसोइयों का भुगतान समय पर कर दिया गया है, लेकिन भरतपुर में 8 महीने से प्रक्रिया अटकी है। नियमानुसार प्रति थाली 22 रुपये का सरकारी अनुदान देय होता है। जिले की 41 रसोइयों का कुल बकाया लगभग 3 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। संचालकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित राशि का भुगतान नहीं होता, तब तक रसोइयों का संचालन दोबारा संभव नहीं होगा।

