शिखर अग्रवाल दंपत्ति के मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही हो
भरतपुर (विष्णु मित्तल) राज्य के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक अधिकारी शिखर अग्रवाल दंपत्ति पर लगे आरोपों की उच्च स्तरीय जांच के लिए समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। जिसमें आग्रह किया है कि आईएएस शिखर अग्रवाल व उनकी पत्नी भारतीय पुलिस सेवा की वरिष्ठ अधिकारी प्रशाखा माथुर तथा उनके परिवारजनों पर जो आरोप लगाये हैं उनकी जांच केन्द्रीय जांच एजेंसियों से स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से कराई जाये। उन्होंने पत्र में यह कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाये जायें, उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही अमल में लाई जाये।
गुप्ता ने अपने पत्र में कहा है कि विभिन्न मीडिया माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार संबंधित शिखर अग्रवाल दंपत्ति एवं उनके परिवारजनों द्वारा अलवर जिले के अजबगढ़ क्षेत्र में 20 विला तथा उदयपुर के बुझड़ा रिसोर्ट में 20 कॉटेज खरीदे जाने का मामला सामने आया है। रिपोर्टों में लगभग 6.15 करोड़ रुपये नकद लेन-देन तथा करीब 1.80 करोड़ रुपये मूल्य की तीन लग्जरी गाड़ियों, जिनमें दो बी.एम.डब्ल्यू कारें भी शामिल बताई गई हैं, के हस्तांतरण का उल्लेख किया गया है। इन सभी तथ्यों की स्वतंत्र वित्तीय एवं कानूनी जांच आवश्यक है।
गुप्ता ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में शिखर अग्रवाल के उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा उद्योग एवं निवेश विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ प्रशासनिक निर्णयों और संबंधित कंपनी को मिले संभावित लाभों के बीच संबंध होने की आशंका व्यक्त की गई है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित परियोजनाओं के कन्वर्जन आदेश, पर्यावरणीय अनुमतियों, सी.टी.ई एवं सी.टी.ओ तथा राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम के अंतर्गत दी गई संभावित कर एवं वित्तीय रियायतों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। साथ ही वर्ष 2024 एवं 2025 में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान संबंधित कंपनी के पक्ष में निस्तारित फाइलों, प्रशासनिक निर्णयों, अनुमतियों एवं सिफारिशों की भी जांच होनी चाहिए।
गुप्ता ने कहा कि इस प्रकरण के लगातार मीडिया में सामने आने से राजस्थान सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली एवं सार्वजनिक छवि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और सरकार की काफी किरकिरी हुई है। इस प्रकरण की आंच राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर भी पड़ सकती है। इसलिए जांच का दायरा केवल संबंधित अधिकारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि किसी मंत्री, राजनीतिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि अथवा अन्य प्रभावशाली व्यक्ति की कोई भूमिका, सिफारिश, दबाव या अनुचित हस्तक्षेप तो नहीं रहा। गुप्ता ने कहा कि यह प्रकरण केवल कुछ संपत्तियों की खरीद का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता, लोकसेवकों की जवाबदेही, सार्वजनिक पद की गरिमा एवं शासन व्यवस्था में आम नागरिकों के विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
गुप्ता ने कहा कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में सुशासन, प्रशासनिक शुचिता, पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को विशेष महत्व दिया जाता था। राजस्थान की इसी गौरवशाली प्रशासनिक परंपरा और नैतिक मूल्यों का अनुसरण करते हुए वर्तमान में भी भ्रष्टाचार के किसी भी गंभीर आरोप को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मूल भावना है। चाहे कोई अधिकारी कितना ही वरिष्ठ या प्रभावशाली क्यों न हो, यदि उसके विरुद्ध गंभीर आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून सभी के लिए समान है और दोष सिद्ध होने पर किसी को भी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में गुप्ता ने सीबीआई से पूरे प्रकरण की जांच कराने तथा ED एवं आयकर विभाग से उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, नकद भुगतान, संपत्तियों के वास्तविक मूल्य, वाहनों के हस्तांतरण एवं आय के ज्ञात स्रोतों की जांच कराने का अनुरोध किया है।
उन्होंने संबंधित आईएस अधिकारी, उनकी आईपीएस अधिकारी पत्नी एवं परिवारजनों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों तथा संबंधित कंपनी के साथ हुए वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कराने की मांग की है। जांच में यदि भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति अथवा धन शोधन के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

