एफपीओ पॉलिसी जारी नहीं करना और कृषक कल्याण कोष के पैसे को निवेशकों को देना किसानों के साथ धोखा - विधायक दीपचन्द खैरिया

Nov 4, 2026 - 18:27
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एफपीओ पॉलिसी जारी नहीं करना और कृषक कल्याण कोष के पैसे को निवेशकों को देना किसानों के साथ धोखा - विधायक दीपचन्द खैरिया

खैरथल (हीरालाल भूरानी) किसान आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एवं किशनगढ़ बास विधायक दीपचंद खैरिया ने राज्य में किसान उत्पादक संगठन (FPO) नीति जारी किए बिना 'एग्रो फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी 2026' जारी करने पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। विधायक ने इसे किसान विरोधी कदम करार देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय एफपीओ ड्राफ्ट के अनुरूप तत्काल राज्य नीति जारी करने की मांग की है।

विधायक के निजी सहायक सुनील कांत गोल्डी ने बताया कि पत्र में विधायक ने उल्लेख किया कि कृषि राज्य का विषय है, इसलिए इस पर स्पष्ट नीति बनाकर क्रियान्वयन करना सरकार का मूल दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट और राजस्थान स्पाइस कॉन्क्लेव 2025 में 500 नए एफपीओ के गठन की घोषणा की थी, लेकिन आज तक न तो नई नीति बनी और न ही धरातल पर नए संगठनों का गठन हुआ।

  • विधानसभा प्रश्न से हुआ खुलासा

विधायक खैरिया ने कहा कि विधानसभा प्रश्न (VSQ 3406) से यह बात सामने आई है कि विभाग द्वारा एफपीओ नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित की गई थी, परंतु सरकार ने अब तक इसे अनुमोदित नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना एफपीओ नीति के फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी लाकर केवल चहेते उद्योगपतियों व निवेशकों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आम किसान लाभ से वंचित रह जाएंगे।

  • कृषक कल्याण कोष के उपयोग पर आपत्ति

विधायक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कृषक कल्याण कोष का गठन किसानों के सशक्तिकरण और रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए किया गया था। इस कोष की राशि का उपयोग उद्योगपतियों व बड़े निवेशकों के हित में किया जाना घोर आपत्तिजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार निवेशकों को 'रिप्स' के तहत मंडी शुल्क में 7 वर्ष की छूट और भूमि रूपांतरण पर स्टांप ड्यूटी माफी दे रही है, जबकि किसानों के अपने संगठन (FPO) से मंडी शुल्क वसूला जा रहा है और उन्हें ऐसी कोई राहत नहीं दी गई है।

विधायक दीपचंद खैरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह किसानों के हितों से जुड़ा एक गंभीर विषय है। इसे आगामी विधानसभा सत्र में पूरी मजबूती से उठाया जाएगा ताकि राष्ट्रीय एफपीओ नीति की तर्ज पर राज्य में नीति लागू हो और किसान उत्पादक संगठनों को भी उद्योगपतियों, कॉपरेटिव और स्टार्टअप्स के समान सभी सुविधाएं मिल सकें।

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