किसानों को सौर ऊर्जा पंप संयंत्र लगाना हुआ सस्ता - जीएसटी दरों में संशोधन से होगी 9241 रुपये तक की बचत
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 16 अक्टूबर। किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब सौर ऊर्जा पंप संयंत्र लगाना पहले से सस्ता हो गया है। उद्यान विभाग के उप निदेशक जनक राज मीना ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 22 सितंबर से सौर ऊर्जा उपकरणों पर जीएसटी दरों में संशोधन किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पीएम कुसुम योजना के कम्पोनेन्ट-बी के अंतर्गत पंप संयंत्र स्थापित करने वाले किसानों को 9 हजार 241 रूपये तक की बचत होगी।
उन्होंने बताया कि अनुबंधित कंपनियों द्वारा नई जीएसटी दरों के अनुसार गाइडलाइन उद्यान विभाग को प्राप्त हो गई है। अब कृषकों द्वारा नई दरों के अनुसार ही अपना अंशदान जमा किया जाएगा। जीएसटी दरों में कमी से विभिन्न क्षमता के पंप संयंत्रों पर किसानों को 4 हजार 354 से 9 हजार 241 रूपये तक की बचत होगी।
जिले में इस वर्ष 500 किसानों को सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका लाभ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए किसान के पास कम से कम 0.40 हेक्टेयर भूमि होना आवश्यक है। यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए उपयोगी है जो सिंचाई हेतु डीजल पंपसेट पर निर्भर हैं या जिनके पास कृषि विद्युत कनेक्शन नहीं है।
पूर्व में 7.5 एचपी एसी पंप सेट की कुल लागत 4 लाख 20 हजार 121 रूपये थी, जिस पर कृषक अंश 1 लाख 81 हजार 437 रूपये जमा करता था। अब संशोधित जीएसटी दरों के बाद इसकी कुल लागत घटकर 4 लाख 2 हजार 32 रूपये हो गई है और कृषक अंश घटकर 1 लाख 73 हजार 625 रूपये रह गया है। इसी प्रकार 7.5 एचपी डीसी पंप सेट की लागत 4 लाख 33 हजार 803 रूपये हो गई है, जिससे किसानों को पर्याप्त बचत होगी।
इसके अलावा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को 45 हजार की अतिरिक्त सहायता भी देय होगी। वर्तमान में 3, 5, 7.5 व 10 एचपी क्षमता के एसी/डीसी, सर्फेस व समरर्सिबल पंप सेट हेतु राज्य सरकार द्वारा 32 फर्मों को अनुमोदित किया गया है। वर्ष 2025-26 में सामान्य वर्ग के 400, एससी वर्ग के 50 तथा एसटी वर्ग के 50 किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पीएम कुसुम कम्पोनेन्ट-बी के अंतर्गत 60 प्रतिशत अनुदान पर सौर ऊर्जा पंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर निर्भरता कम होगी तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी।

