450 हेक्टेयर सैराबी भूमि पर प्रस्तावित भरतपुर विकास प्राधिकरण की लैंड पूलिंग को लेकर उठे गंभीर सवाल
18 प्राकृतिक नालों के बहाव क्षेत्र को सुरक्षित रखने की मांग, सीताराम गुप्ता ने जिला कलेक्टर को लिखा पत्र
भरतपुर (विष्णु मित्तल) भरतपुर विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना के अंतर्गत लगभग 450 हेक्टेयर सैराबी भूमि पर आवासीय कॉलोनी विकसित किए जाने की योजना को लेकर समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने जिला कलेक्टर, को पत्र भेजकर योजना पर व्यापक पुनर्विचार करने तथा प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र में लगभग 18 पुराने प्राकृतिक नाले एवं उनके जल बहाव क्षेत्र मौजूद हैं। ये नाले वर्षों से क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। यदि इनके बहाव मार्ग अवरुद्ध किए गए अथवा उन पर निर्माण हुआ तो भविष्य में वर्षा के दौरान जलभराव, कृषि भूमि को नुकसान, भूजल पुनर्भरण में बाधा तथा आसपास के आबादी क्षेत्रों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े आवासीय या शहरी विकास से पहले प्राकृतिक जल प्रवाह की स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
समृद्ध भारत अभियान के निदेशक गुप्ता ने पत्र में उल्लेख किया कि भरतपुर में पूर्व में भी लैंड पूलिंग से संबंधित योजनाएं लाई गई थीं, जिन्हें पर्याप्त विचार-विमर्श एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण वापस लेना पड़ा। ऐसे में वर्तमान योजना को आगे बढ़ाने से पहले पूर्व की योजनाओं के अनुभव और उन्हें वापस लेने के कारणों का भी गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना समुचित अध्ययन, जनसहमति, तकनीकी परीक्षण और भविष्य के प्रभावों पर विचार किए केवल भूमि का विकास करना वास्तविक विकास नहीं, बल्कि विनाश का रास्ता बन सकता है।
गुप्ता ने जिला प्रशासन से मांग की कि प्रस्तावित क्षेत्र का राजस्व विभाग, भरतपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जल संसाधन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा स्थल निरीक्षण कराया जाए। पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शों एवं मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी प्राकृतिक नाले अथवा उसके बहाव क्षेत्र पर अतिक्रमण या निर्माण न हो।
उन्होंने मांग की कि योजना के लिए सक्षम तकनीकी संस्था से विस्तृत हाइड्रोलॉजिकल एवं ड्रेनेज प्लान तैयार कराया जाए। किसी भी भू-रूपांतरण अथवा निर्माण की अनुमति तब तक नहीं दी जाए, जब तक प्राकृतिक जल प्रवाह के लिए पर्याप्त एवं वैज्ञानिक व्यवस्था सुनिश्चित न हो।
गुप्ता ने कहा कि इस योजना से जुड़े स्थानीय किसानों एवं प्रभावित नागरिकों के साथ आवश्यक जनसुनवाई एवं व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों के अनुभव और क्षेत्र की वास्तविक भौगोलिक परिस्थितियों को शामिल करना जरूरी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रस्तावित विकास योजना में प्राकृतिक नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों एवं जल पुनर्भरण क्षेत्रों को संरक्षित रखते हुए आवश्यक ग्रीन बेल्ट एवं ड्रेनेज कॉरिडोर विकसित किए जाएं, ताकि शहरी विकास के साथ प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था भी सुरक्षित रह सके।

