राजऋषि बाबा भर्तृहरि का लक्खी मेला शुरू: अष्टमी को भरेगा मुख्य मेला, उमड़ेगी 6 राज्यों के श्रद्धालुओं की भीड़
अलवर में लोक देवता बाबा भर्तृहरि का लक्खी मेला पूजा-अर्चना के साथ शुरू, अष्टमी को भरेगा मुख्य मेला
अलवर / अनिल गुप्ता
अलवर जिले की सरिस्का अभयारण्य सीमा से सटी पावन तपोभूमि पर जन-जन की आस्था के प्रतीक राजऋषि बाबा भर्तृहरि महाराज का वार्षिक लक्खी मेला भाद्रपद शुक्ल पक्ष षष्ठी से विधि-विधान व पूजा-अर्चना के साथ धूमधाम से शुरू हो गया है।
मेले का मुख्य आकर्षण भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को रहेगा, जब बाबा का 'भराभर' (मुख्य) मेला आयोजित किया जाएगा। इस दिन अंचल के घर-घर में बाबा की ज्योत जलाई जाएगी तथा पारंपरिक दाल-बाटी-चूरमा का भोग लगाकर नाथ संप्रदाय के साधु-संतों को भोजन कराया जाएगा।
6 राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु: उज्जैन के राजपाट को त्यागकर तपस्वी बने बाबा भर्तृहरि के इस लक्खी मेले में राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु मन्नतें मांगने और धोक लगाने पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि बाबा भर्तृहरि ने अपनी उग्र तपस्या से अरावली की पहाड़ियों से अविरल गंगा धारा का प्रादुर्भाव किया था, जो आज भी निरंतर प्रवाहित हो रही है।
पारंपरिक वस्तुओं और वैराग्य शतक की भारी मांग: मेला परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा घरेलू व पारंपरिक वस्तुएं जैसे मूसल, राई, मटके, बिलोने, खुरचन, लाठी और बांसुरी की जमकर खरीदारी की जा रही है। इसके साथ ही बाबा भर्तृहरि द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथों 'नीति शतक' एवं 'वैराग्य शतक' की प्रतियों को खरीदने के लिए भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है

